नई दिल्ली। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बीच एक खबर सुर्खियों में है। अफगानिस्तान में एक ट्रिलियन डॉलर यानी कि 74.37 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के मिनरल्स के भंडार हैं। 2010 में अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और जियोलॉजिकल सर्वे ने खुलासा किया था कि अफगानिस्तान के मध्य और दक्षिण क्षेत्र में लगभग एक ट्रिलियन डॉलर का मिनरल्स का भंडार है, जो कि देश की इकॉनॉमिक प्रॉसपेक्ट्स को पूरी तरह से बदल सकता है। तालिबान के सत्ता में लौटने के साथ ही विशेषज्ञों को अफगानिस्तान के मिनरल्स की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। विशेषज्ञों के अनुसार अफगानिस्तान में लोहे, तांबे, कोबाल्ट, सोने और लीथियम के बड़े भंडार मौजूद हैं।

मिनरल्स में बन सकता है दुनिया का सबसे बड़ा देश

साइंटिस्ट्स का मानना है कि अफगानिस्‍तान के दुर्लभ मिनरल्स संसाधन पृथ्वी पर सबसे बड़े हैं। मालूम हो कि दुर्लभ मिनरल्स इस समय टेक्‍नोलॉजी की सबसे बड़ी जरूरत हैं। इनकी मदद से ही मोबाइल फोन, टेलीविजन, हाईब्रिड इंजन, कम्प्यूटर, लेजर और बैटरी तैयार की जाती हैं। वहीं ईकोलॉजिकल फ्यूचर्स ग्रुप के फाउंडर साइंटिस्‍ट और सिक्योरिटी एक्सपर्ट रॉड शूनोवर ने कहा कि सुरक्षा चुनौतियों, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और सूखे ने पहले इन मिनरल्स को निकालने से रोका है। अब अफगानिस्तान में तालिबान के आने से ये हालात जल्द बदलने की संभावना नहीं है। सबसे बड़े मिनरल्स भंडार लोहे और तांबे के हैं और इनकी मात्रा काफी ज्‍यादा है। ये इतनी मात्रा में हैं कि अफगानिस्तान इन मिनरल्स में दुनिया का सबसे बड़ा देश बन सकता है। इसी पर तालिबान से लेकर उसके समर्थक देशों की नजरें लगी हैं, जिसमें चीन भी शामिल हैं।

यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के मिर्जाद ने 2010 में एक मैगजीन को बताया था कि अगर अफगानिस्तान में कुछ साल शांति रहती है और उसके मिनरल्स संसाधनों का विकास होता है, तो वह एक दशक के अंदर इस क्षेत्र के सबसे अमीर देशों में से एक बन सकता है। बता दें कि पूरी दुनिया में लीथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ अर्थ ऐलीमेंट्स के उत्पादन में सिर्फ 3 देशों की 75 फीसदी की हिस्सेदारी है। इन देशों में चीन, रिपब्लिक ऑफ कांगो और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार पारंपरिक कार के मुकाबले औसत इलेक्ट्रिक कार के लिए छह गुना ज्यादा मिनरल्स की आवश्यकता होती है। लीथियम, निकल और कोबाल्ट का बैटरी बनाने में इस्तेमाल होता है। कॉपर और एल्युमीनियम इलेक्ट्रिसिटी नेटवर्क में उपयोग होता है, जबकि विंड टर्बाइन से जुड़े कार्यों में मैग्नेट बनाने के लिए दुर्लभ अर्थ ऐलीमेंट्स की जरूरत होती है।

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