कोरोना मरीजों के लिए संजीवनी के रूप में ये दवा! तेजी से हो रहा सुधार

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दुनियाभर में कोरोना मरीजों का आंकड़ा प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है, चीन के वुहान से फैला कोरोना वायरस ने आज विश्व के 180 से भी अधिक देशों को अपनी चपेट में ले लिया है। वहीं दूसरी तरफ इस महामारी से बचने के लिए तमाम उपाय खोजे जा रहे हैं। कई देशों में क्लीनिकल ट्रायल पर तेजी से काम हो रहा है। इस बीच एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि, ‘कोर्टिकोस्टेरॉयड’ के इस्तेमाल से कोरोना मरीजों की हालत में सुधार लाया जा सकता है। दरअसल कोरोना मरीजों को डॉक्टर्स सावधानी पूर्वक दवा का सेवन करा रहे हैं, खासतौर से जिन लोगों में ‘एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम’ (ARDS) यानी सांस से जुड़ी तकलीफ है, उन्हें लेकर ज्यादा सावधानी बरती जा रही है।

कोरोना वायरस को लेकर हुई इस नई स्टडी में कोर्टिकोस्टेरॉयड द्वारा मरीजों की हालत में कैसे सुधार लाया जा सकता है, उसपर डॉक्टरों को सफलता प्राप्त हुई है। खुद इस बात की पुष्टि ‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ने की है। बता दें कि (JAMA) में इस सप्ताह प्रकाशित तीन अलग-अलग रिपोर्ट्स में SARS-CoV-2 के कारण फैल रहे कोविड-19 को बेहतर समझने में मदद मिली है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि क्या कोरोना के गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों की हालत में स्टेरॉयड से सुधार लाया जा सकता है?, जिनमें ARDS के रोगी भी शामिल हैं।

उसपर WHO ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ARDS की समस्या से जूझ रहे कोरोना मरीजों की हालत में कोर्टिकोस्टेरायड के बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं।

क्या है कोर्टिकोस्टेरॉयड

दरअसल कोर्टिकोस्टेरॉयड को ग्लूकोकोर्टिकोय या स्ट्रेरॉयड भी कहा जाता है. ये किसी एनाबॉलिक स्टेरॉयड से एकदम अलग है. इसका इस्तेमाल इनफ्लेमेटरी डिसीज जैसे की अस्थमा, एलर्जी ये पेट से जुड़ी समस्याओं में किया जाता है.

ये स्टेरॉयड इतना तेज है कि इसे बिना डॉक्टर की सलाह के लेने से जान का खतरा बढ़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ARDS के ऐसे कोरोना संक्रमितों की हालत में तेजी से सुधार आया है, जिनके इलाज में कोर्टिकोस्टेरायड का इस्तेमाल किया गया था. यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग के एक प्रोफेसर क्रिस्टोफर सीमौर ने कहा,

‘अमेरिकन जर्नल में प्रकाशित ये रिपोर्ट्स गंभीर हालात में अब तक के सबसे बेहतर वैश्विक सहयोग की झलक साबित हुई है।

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