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दिल्ली। शरीर की जैविक क्रिया और जानकारी रखना प्रत्येक आदमी और औरत का कर्तव्य है। जब तक आप अपने शरीर के होने वाले परिवर्तनों को नहीं जानेंगे तब तक शरीर की सही देखभाल भी नहीं कर पायें। महिलाओं के प्राइवेट पार्ट को लेकर एक शोध किया गया है कि लोग अपने बारे में कितना जानते हैं। शरीर के बाहरी अंगों के बारे में तो हर कोई जानता है लेकिन भीतरी अंगों के बारे में शायद ही लोगों को पता हो। जो लोग भीतरी अंगों को जानते हैं, उनकी भी जानकारी बहुत ही कम है। बात जब प्राइवेट पार्ट्स की होती है तो लोग इसके बारे में बात करने से कतराते हैं बल्कि अपनी अज्ञानता पर शर्माते हैं। हैरानी की बात तो ये है कि खुद महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट्स के नाम तक नहीं जानतीं हैं। यही वजह है कि इन्हें लेकर लोगों में जागरूकता की कमी नजर आती है। इसका असर उनके स्वास्थ्य और जीवन पर भी पड़ता है। पुरूषों के साथ-साथ महिलाओं को भी अंगों के बारे में लोगों में जागरूकता कम है। लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से ब्रिटेन में एक सर्वे किया गया। सर्वे के नतीजे बेहद आश्चर्यजनक रहे। शोधकर्ताओं ने सर्वे में एक चित्र के जरिए महिलाओं के प्राइवेट पार्ट्स के भीतरी नाम लोगों से पूछे। प्राइवेट पार्ट का नाम बताने वालों की संख्या बहुत ही कम रही। सर्वे में महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल थे। इस शोधपरक अध्ययन को को इंटरनेशनल यूरोगायनेकॉलॉजी जर्नल (International Urogynecology Journal ) में प्रकाशित किया गया।

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सर्वे का मकसद लोगों में मानव शरीर के बारे में जागरूकता के बारे मेें बताना था। सबसे आश्चर्यजनक तो यह रहा कि महिलाएं भी अपने सभी अंगों के नाम नहीं जानतीं थीं। अध्ययन में पाया गया कि महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट के अंदरूनी अंगों के नाम नहीं जानतीं हैं, जिसके कारण उन्हें इनसे जुड़ी कोई समस्या होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने में मुश्किलों का सामने करना पड़ता है। महिलाएं चिकित्सक से अपनी बात कह नहीं पाती हैं।

प्राइवेट पार्ट्स के नाम भी नहीं बता सके
इंग्लैंड स्थित मैनचेस्टर के एक हॉस्पिटल में Outpatient appointments में हिस्सा लेने आए लोगों को एक प्रश्नावली दिया गया। प्रश्नावली में चित्र देखकर उन्हें महिलाओं के प्राइवेट पार्ट के अंदरूनी अंगों के नाम बताने थे। आधे से भी कम लोगों को सही जवाब दे पाये। शोधकर्ताओं ने पाया कि आधे से अधिक ब्रिटिशर्स चित्र में (मूत्रमार्ग) को नहीं पहचान पाये। 37 प्रतिशत लोग Clitoris को नहीं पहचान पाये। ऐसे लोगों में महिलाएं भी शामिल थीं। सर्वे में शामिल लागों को वल्वा (Vulva) का एक डायग्राम दिया गया। चित्र देख कर उनसे इसके पार्ट्स के नाम लिखने को कहा गया। प्रतियोगितयों में जागरूकता की इतनी कमी नजर आई कि आधे से अधिक ने इस डायग्राम को खाली छोड़ दिया। रिसर्चरों ने कहा कि लोग Urethra और Clitoris में फर्क नहीं कर पाये।

शोध कर रहे वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि लोगों में महिला जननांगों और शारीरिक रचना की समझ नहीं के बराबर है। शारीरिक अंगों के बारे मेे जानकारी नहीं होना लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खराब है। सर्वे में शामिल महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में ज्यादा सही जवाब दिये। मैनचेस्टर के सेंट मैरी अस्पताल में सलाहकार यूरोलॉजिस्ट और अध्ययन के सह-लेखक फियोना रीड ने कहा कि महिलाओं की शारीरिक रचना की लोगों में समझ हो और वो इसपर बात कर सकें। इसे लेकर अभी काफी कुछ किए जाने की जरूरत है। पहले तो लोगों को अपने जैविक शरीर के प्रति जागरूक और संवेदनशील होना होगा।

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