ऐसे लोगों से घुलते-मिलते हैं आप तो हो जाएं सावधान! नहीं तो हो जाएंगे कोरोना संक्रमित

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दुनिया में कोरोना वायरस एक वैश्विक बीमारी का रूप ले चुका है। इसके प्रभाव के चलते 2 करोड़ लोग अब तक इसकी चपेट में आ चुके हैं। इसके बढ़ते संक्रमण को देखते हुए ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना अभी शांत होने वाला नहीं है। हालांकि कई देशों में इस पर काम भी चल रहा है। वहीं बड़े पैमाने पर वैज्ञानिकों की टीम कोरोना वैक्सीन पर रिसर्च कर रही है, लेकिन अभी कोई सटीक समाधान नहीं निकल पाया है। कोरोना वैक्सीन को लेकर कई तरह के दावे भी किए जा रहे हैं, उम्मीद है कि साल के अंत तक लोगों को इस महामारी से छुटकारा मिल जाए। इस बीच कोरिया में की गई एक स्टडी में कोरोना के लक्षणों पर रिसर्च की गई है। इसमें बताया गया है कि सामान्य लोगों को भी कोरोना वायरस हो सकता है, लेकिन वह आपको दिखाई नहीं देता। इस थ्योरी को लेकर काफी वक्त से चर्चा चल रही है और अब एक नई स्टडी में इसके पुख्ता सबूत मिले हैं।

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दरअसल स्टडी के मुताबिक, बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमित लोगों की नाक, गले और फेफड़ों में उतने ही कोरोना वायरस मौजूद होते हैं जितने कोरोना से किसी बीमार शख्स में होते हैं। इस एक्सपेरिमेंट को साउथ कोरिया की JAMA

Internal Medicine में प्रकाशित किया गया है। स्टडी में यह भी पता चला है कि बीमार लोगों के शरीर में जितने दिन तक वायरस होते हैं, करीब-करीब उतने ही दिन तक बिना लक्षण वाले लोगों में भी कोरोना वायरस मौजूद रहते हैं।

बता दें कि स्टडी के दौरान साउथ कोरिया की टीम ने 6 मार्च से 26 मार्च के दौरान 193 लक्षण वाले और 110 बिना लक्षण वाले लोगों के सैंपल लिए जिन्हें आइसोलेट करके रखा गया था. 110 बिना लक्षण वाले मरीजों में से 89 लोगों में बाद में भी लक्षण नहीं उभरे, जबकि 21 लोगों में बाद में लक्षण दिखाई दिए. वहीं, स्टडी में शामिल ज्यादातर लोग युवा थे.

कुछ एक्सपर्ट तर्क देते हैं कि बिना लक्षण वाले लोग कम खांसते या छींकते हैं, इसलिए उनके वायरस फैलाने की आशंका कम रहती है। हालांकि फिर भी इन लोगों से सावधानी बरतना जरूरी है। साउथ कोरिया की स्टडी पर हॉन्ग कॉन्ग

यूनिवर्सिटी के महामारी विशेषज्ञ बेंजामिन कॉलिंग का कहना है कि निश्चित तौर से इस स्टडी का डेटा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह स्टडी उस थ्योरी को साबित करती है जिसको लेकर हम काफी समय से आशंका करते रहे हैं।

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