कोरोना वायरस इस वजह से इंसानी शरीर पर जल्दी अटैक करता है, वैज्ञानिकों की रिसर्च में पाया गया ये जीव

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pangoline

दुनियाभर में फैला कोरोना वायरस नाम सुनकर ही कुछ लोगों को इसकी बीमारी हो जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं अब तक कोरोना की जड़े कितने देशों में फैल चुकी है, और कितने लोग इस बीमारी से ग्रसित है. तो चलिए आपको बताते हैं अब तक पूरी दुनिया में कोरोना के 10 लाख मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं. जिनमें से 30 हजार से ज्यादा लोगों ने इस दुनिया से अलविदा कह दिया है। इस बीच कोरोना वायरस को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है.

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वैज्ञानिकों के काफी हद तक प्रयास के बाद ये पता चला है कि इसके भीतर पाए जाने वाले प्रोटीन की खास संरचना ही इसे इंसानी शरीर की कोशिकाओं से जुड़ने में मदद करती है. और यही वजह है कि दूसरे वायरस या बैक्टीरिया की अपेक्षा में ये वायरस तेजी से फैल रहा है।

दरअसल कोरोना वायरस हमारी कोशिका से जुड़ने के लिए कांटेदार या नुकीले स्ट्रक्चर वाले प्रोटीन की मदद लेता है. हमारे भीतर की कोशिकाएं इस प्रोटीन के लिए होस्ट सेल का काम करती हैं और दोनों एक दूसरे से ताले-चाभी की तरह जुड़ पाते हैं. ऑस्टिन में University of Texas के प्रोफेसर Jason McLellan और उनकी टीम ने इसपर शोध किया. इसमें पाया गया कि ridge जैसी संरचना के कारण ये प्रोटीन आसानी से किसी होस्ट कोशिका से जुड़ पाते हैं. अपने आकार की वजह से इसे स्पाइक प्रोटीन नाम दिया गया. सबसे पहले स्पाइक प्रोटीन ह्यूमन सेल रेसेप्टर से जुड़ते हैं.

इसके बाद ही वायरस की झिल्ली या बाहरी परत ह्यूमन सेल मेंब्रेन से जुड़ पाती है. बाहरी परत के जुड़ने के बाद इस वायरस का जीनोम इंसानी कोशिका में प्रवेश करता है और संक्रमण की शुरुआत हो जाती है. यानी अगर प्रोटीन से कोशिका से जुड़ने को रोका जा सके तो संक्रमण ही नहीं हो सकेगा.

किसी भी वायरस की दवा या टीका बनाने में ये बात सबसे अहम है कि वायरस का प्रोटीन कैसा दिखता है और किस तरह से होस्ट सेल पर अटैक करता है. इसके बाद जीनोम स्ट्रक्चर का पता चलता है और उपचार किया जा सकता है. इस बारे में University of Minnesota के शोधकर्ता Fang Li के अनुसार अब वैज्ञानिक इसी दिशा में काम कर रहे हैं कि कैसे प्रोटीन से जुड़ने को रोका जा सके ताकि संक्रमण ही न हो या फिर हो भी जाए तो प्रोटीन और रेसेप्टर को अलग किया जा सके.

गौरतलब है कि इस प्रोटीन को टारगेट करने के लिए वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं कि ये दिखता कैसा है. National Institutes of Health (NIH) ने इसपर स्टडी की. कोविड-19 के मामले में प्रोटीन इंसानी कोशिका से जुड़ने के लिए सबसे प्रभावी है. इसे जांचने के लिए X-ray की मदद ली गई. टीम का मकसद ये जानना था कि सार्स जैसे दूसरे कोरोनावायरस से किस तरह से नए कोरोना की संचरना है जो ये इतनी तेजी से संक्रमण फैल रहा है.

एक्स-रे के दौरान देखा गया कि दोनों ही वायरसों के प्रोटीन इंसानों में ACE2 से जुड़ते हैं. कोरोनावायरस में स्पाइक प्रोटीन होता है लेकिन सभी में प्रोटीन की संचरना अलग-अलग तरह की होती है. लेकिन ये नए वायरस में ridge की तरह बनावट होती है, जो इसे ज्यादा मजबूती से जुड़ने में मदद देती है. University of Minnesota की रिपोर्ट में भी यही बात निकलकर आई कि SARS-CoV-2 की ये बनावट उसे हममें ACE2 रेसेप्टर से मजबूती से जोड़ती है.

पहले ये माना जा रहा था कि चमगाड़द खाने पर इस वायरस के हमले की शुरुआत हुई लेकिन बाद में वैज्ञानिक स्टडी में ये बात गलत साबित हुई. चमगादड़ में पाए जाने वाले वायरस के प्रोटीन की संचरना ऐसी नहीं होती जो इंसानी कोशिका से जुड़ पाए.

इसके बाद सामने आया कि pangolin (छिपकली जैसा दिखने वाला जंतु) में मिलने वाले coronavirus ह्यूमन रिसेप्टर से साथ मजबूती से जुड़ते हैं. इससे फिलहाल ये कयास लग रहे हैं कि असल में पेंगोलिन के साथ ही ये वायरस हमारे शरीर में आए होंगे. वैज्ञानिक जर्नल Nature में यह शोध 30 मार्च को छपा. इसके बाद से एपिडेमियोलॉजिस्ट इसी दिशा में टीके या दवा की खोज में जुट गए हैं. वहीं अगर भारत की बात करें तो कोरोना वायरस के संक्रमित लोगों की संख्या 25 सौ से पार पहुंच गयी है, जिनमें से 50 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है बहराहल पूरे देश में लॉकडाउन लगा हुआ है, लगातार सरकार की तरफ से भी एहतियात बरतने को कहा जा रहा है. डॉक्टर से टीम 24 घंटे अपनी सेवाएं दे रही है कुछ लोगों को इस वायरस से ठीक भी किया गया है.