कोविड-19 अपडेट! इन दो देशों में वैक्सीन बनने की पूरी उम्मीद, इन्हें मिलेगी सबसे पहले

106

दुनिया में कोरोना महामारी के बीच बस अब एक ही उम्मीद दिखाई पड़ रही है, वो है इसकी वैक्सीन। यही एकमात्र विकल्प वैज्ञानिकों के सामने बचा हुआ है चूंकि कई परीक्षण के बाद एक बात तो साफ हो गई है, कि यह महामारी अभी और विकराल रूप ले सकती है। इसलिए इसकी वैक्सीन को बनाने का पुरजोर प्रयास किया जा रहा है। दुनिया में अब तक कोरोना वायरस से जो नुकसान हुआ है इसकी भरपाई करने में साल छह साल का समय भी लग सकता है। इतनी बड़ी तादाद में लोगों की जानें गई हैं। यह सिलसिला लगातार ऐसे ही जारी है। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में आए दिन इजाफा देखने को मिल रहा है। वहीं आंकड़ों की बात करें तो अब तक 2 करोड़ से अधिक लोग इस महामारी का शिकार हुए पड़े हैं। जबकि प्रतिदिन तेजी से इजाफा हो रहा है। वहीं मरने वालों की संख्या भी वैज्ञानिकों को हैरान कर रही है। अब तक दुनिया में 7,74,000 लोग इस वायरस से अपनी जान गंवा चुके है। बहरहाल कोरोना की वैक्सीन को लेकर ऐसा कहा जा रहा है कि साल के अंत तक दो देशों में वैक्सीन का काम पूरा कर लिया जाएगा। जिसमें ब्रिटेन और ऑक्सफॉर्ड शामिल हैं।

ये भी पढ़ें:-कोरोना संकट के बीच इस राज्य में बढ़ाया गया लॉकडाउन, जारी हुई नई गाइडलाइन

हालांकि इससे पहले रूस पूरी दुनिया में ताल ठोक के यह दावा कर चुका है, कि उसके वैज्ञानिकों ने कोरोना की वैक्सीन बना ली है। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन से हरी झंड़ी न मिलने के बाद अभी भी लोग इसे लेकर आश्वस्त नहीं हैं। वहीं इस

बीच ब्रिटेन की वैक्सीन टास्कफोर्स केट बिंघम ने स्काई-न्यूज से बताया है कि साल के अंत तक दो वैक्सीन बनने की संभावना है जिनमें से एक Oxford University की वैक्सीन और दूसरी जर्मनी की कंपनी BioNTech की वैक्सीन है।

बिंघम ने बताया कि, ज्यादा संभावना है कि ये अगले साल की शुरुआत में वैक्सीन आएं लेकिन सब कुछ ठीक रहा तो ये इस साल के अंत तक भी आ सकती हैं। हालांकि दोनों देशों के वैज्ञानिक काफी हद तक वैक्सीन बनाने के नजदीक हैं। उम्मीद है कि सारे ट्रायल पूरे होने के बाद इस वैक्सीन को मार्केट में उतारा जाए।

बिंघम के मुताबिक वैक्सीन दिए जाने पर 65 की उम्र के लोगों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, दूसरी बीमारियों से ग्रस्त लोगों, फ्रंटलाइन हेल्थ और सोशल केयर वर्कर्स को भी यह पहले दी जाएगी। बुजुर्ग लोगों को युवाओं से अलग

वैक्सीन दिए जाने की भी संभावना है चूंकि उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है।

मालूम हो कि दो संभावित कैंडिडेट वैक्सीन बनाने की रेस में हैं, एक ऑक्सफर्ड की और दूसरी BioNTech की जर्मन वैक्सीन।’ उन्होंने कहा कि ये दोनों ऐसी हैं कि अगर सबकुछ ठीक रहा तो इन्हें बनाकर इस साल डिलिवर किया जा सकता है। ऑक्सफर्ड और

AstraZeneca की वैक्सीन इस रेस में सबसे आगे मानी जाती रही है। हालांकि, रूस ने अपनी वैक्सीन को रजिस्टर करा लिया है और चीन ने अभी एक वैक्सीन का पेटेंट करा लिया है। वहीं कोरोना की वैक्सीन को लेकर कई देशों में क्लीनिकल ट्रालय जोरों पर चल रहा है। भारत में भी कोरोना वैक्सीन को लेकर मानव परीक्षण किया जा रहा है, हाल ही में किए गए पीजीआई रोहतक में क्लीनिकल ट्रायल के दूसरे फेज में डॉक्टरों को सफलता हाथ लगी थी। बता दें कि 12 शहरों के 200 वोलियंटरों पर इस वैक्सीन का ट्रालय किया गया था। जिसका बाद में कोई भी साइडइफेक्ट देखने को नहीं मिला। वहीं भारत की covaxin को भारत बाइटेक कंपनी ICMR द्वारा तैयार किया जा रहा है। उम्मीद है कि साल के अंत तक इसे पूरी तरह से तैयार कर मार्केट में लॉन्च किया जाएगा।

ये भी पढ़ें:-भारत में बढ़ा कोरोना का संक्रमण, जानें कितनी रही मौत और रिकवरी रेट की दर