Uttrakhand Lansdowne Hill Station

Trip to Lansdowne: लॉकडाउन..नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं कि. अब फिर से घर में कैदी की तरह रहना होगा. इस लॉकडाउन ने सबकी जिंदगी पर एक ब्रेक लगा दिया है. ऐसा लगता है मानो कितना कुछ पीछे छूट गया और अब हर पल में खुशी ढूंढने की कोशिश करते हैं. वैसे तो लॉकडाउन हर किसी के लिए मुश्किल रहा लेकिन उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा बुरा था जिन्हें घूमने का शौक है बिल्कुल मेरी तरह. सच कहूं तो मेरे लिए कोरोना काल वाकई बहुत बुरा रहा है और अब जब सब ठीक होने लगा है तो फिर से कहीं घूमने की प्लानिंग कर रही हूं. कहां जाऊंगी ये तो अभी पूरी तरह तय नहीं हुआ है. लेकिन आपको बताऊंगी अपनी छोटी-सी यात्रा की कहानी. जिसका बजट भी कम था और यात्रा भी काफी रोमांचक रही थी.

‘कालो का डांडा’
उत्तराखंड नाम तो सुना ही होगा. जिसे देवभूमि भी कहा जाता है. यूं तो इस प्रदेश में घूमने के लिए काफी कुछ है. पर मैंने चुना लैंसडौन, जो एक खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस है. अलसाई घुमावदार सड़कें,lansdowne 1 चीड़ के पेड़ और अंग्रेजों के समय की बसाई गई छावनी. ये पहचान है ‘कालो का डांडा’ यानि लैंसडौन की. ये नाम भी मुझे स्थानीय लोगों से पता चला. जिनकी बोली में बहुत मिठास है और हर किसी को अपना बना लेती है.

ये जगह जितनी खूबसूरती है उतनी ही रहस्यमयी भी है. यहां के कुछ ऐसे वाक्ये और किस्से ऐसे हैं जिन्हें सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे. इन रहस्यों के बारे में मैं आपको फिर कभी बताऊंगी. आज तो सिर्फ हम बात करेंगे कम बजट की यात्रा की. यहां आने के लिए आपको लंबी छुट्टियों की जरूरत नहीं बल्कि सिर्फ एक से दो दिन चाहिए.

थम सा गया था वक्त
शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी और लाइफ की सौ टेंशन से इतनी परेशान हो गई थी कि सोचा चलो कहीं घूमने जाया जाए. मन में कई जगह के ख्याल आए लेकिन तय किया लैंसडौन जाना. जहां जाकर ऐसा लगा मानो वक्त थम सा गया हो. सड़कों पर चलते हुए पहाड़ों की खूबसूरती को निहारना किसी सपने से कम नहीं था.Lansdowne 6 लैंसडौन पहुंचकर सबसे पहले मयूर होटल की तरफ रुख किया और पेट पूजा की, भई घूमने के लिए कुछ खाना भी तो जरूरी है और सच कहूं तो यहां की गरमा-गरम चाय ने दिल जीत लिया, इसके बाद शुरू हुआ सफर.

भुल्ला ताल
पहुंचते-पहुंचते दोपहर हो गई थी तो सोचा सबसे पहले झील का दीदार किया जाए.अरे. लैंसडौन जाओ और भुल्ला ताल ना घूमो. ऐसा कैसे हो सकता है.lansdowne 2 तो मैंने भी 150 रुपये की टिकट ली और अपनी पसंदीदा बोट पर बैठकर झील का लुत्फ उठाया.

टिप-इन-टॉप
लोगों से टिप-इन-टॉप के बारे में काफी कुछ सुना था तो मैं भी चल पड़ी यहां की सैर करने. इसे लैंसडौन का फेमस टूरिस्ट स्पॉट भी कहते हैं. जो सेंट मैरी चर्च के काफी करीब है और यहां से बर्फीली पहाड़ियों का दीदार होता है.
टिप-इन-टॉप पर खड़े होकर सर्पीली सड़कों को देखना अपने-आप में एक अनुभव होता है. lansdowne 3कहते हैं यहां से हिमालय दिखता है लेकिन मौसम साफ नहीं हो तो सिर्फ सुंदर पहाड़ नजर आते हैं और ठंडी-ठंडी हवा मन को छू लेती है.  यहां घूमने के बाद काफी थक गई थी इसलिए जहां रूम लिया था यानि मयूर होटल जाकर आराम किया और कमरे की खिड़की से ही पहाड़ की शाम निहारी.

सेंट मेरी चर्च
अगला दिन शुरू होते ही गरमा-गरम चाय के साथ लाजवाब परांठे खाए और निकल पड़ी सैर पर. यूं तो लैंसडौन अपनी खूबसूरती के लिए फेमस है लेकिन इसके साथ-साथ सुन्दर चर्चों में भी जाना जाता है. lansdowne 4इस चर्च का निर्माण गढ़वाल रेजिमेंटल राइफल्स सेंटर द्वारा किया गया था. यहां जाकर मन को काफी शांति मिलती है और सबसे खास बात ये कि यहां आजादी के पहले के भारत के कई ऐसे चित्र हैं जो शायद ही देखने को मिलते हैं.

लैंसडोन बाजार
घूमने के बाद लड़कियां शॉपिंग न करें ऐसा हो नहीं सकता और मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही था. लोगों से पूछकर लैंसडौन बाजार गई. देखने में बाजार छोटा है लेकिन जरूरत की सारी चीजें यहां मिलती हैं. पहाड़ी टोपी सबसे ज्यादा प्रचलित है तो मैं भी मेरे लिए एक टोपी ही खरीदकर लाई और कपड़ों से लेकर कुछ सुंदर चीजें भी खरीदीं.

कैंटीन
वैसे तो कैंटीन में जाने की परमिशन सिर्फ आर्मी के लोगों को होती है. पर यहां एक ऐसी कैंटीन है जहां कोई भी जा सकता है. लेकिन उसके लिए समय होता है, मैं जब तक कैंटीन पहुंची तब तक वो बंद हो चुकी थी.

कौन-सा मौसम है सबसे अच्छा?
पहाड़ी जगहों पर अक्सर लोग सोचने लगते हैं कि आखिर किस मौसम में जाएं. क्योंकि बारिश के वक्त यहां जाना खतरे से खाली नहीं होता. लेकिन लैंसडौन आप किसी भी मौसम में जा सकते हैं. वैसे अप्रैल, नवंबर और दिसंबर का महीना सबसे अच्छा रहता है, चाहें तो जनवरी में प्लान कर सकते हैं. इस समय तो यहां की रौनक देखते ही बनती है. क्योंकि चारों तरफ अलग-अलग जगहों से आए टूरिस्ट नजर आते हैं.

कैसे जाएं लैंसडौन?
अगर आप दिल्ली की तरफ से आ रहे हैं तो आपको कोटद्वार की सीधी बस या ट्रेन मिल जाएगी. वहां से आपको लैंसडोन के लिए सीधी मैक्स मिलेगी. जो आपको लैंसडोन टैक्सी स्टैंड पर उतारेगी.

लैंसडौन में कहां रुके?
टूरिस्ट प्लेस है इसलिए होटल्स भी बहुत सारे हैं. अगर आप दूर से आ रहे हैं तो एक दिन रुकता बनता ही है और पहाड़ों की शाम की बात ही अलग है. इसलिए आप चाहें तो मयूर होटल में रुक सकते हैं या ऑनलाइन अपने हिसाब से होटल का रूम बुक कर सकते हैं. वैसे लैंसडौन के आसपास कई रिसॉर्ट्स बने हैं जो वेकेशन के लिए सबसे अच्छे रहेंगे.

कितना होगा खर्चा?
अपनी गाड़ी से आएंगे तो ज्यादा से ज्यादा आपका खर्चा 5 हजार रुपये तक होगा. वहीं बस या ट्रेन से आने पर खर्चा बढ़ जाएगा क्योंकि किराया घटना-बढ़ता रहता है. लेकिन अगर आप महंगा होटल चुनते हैं तो बजट बढ़ सकता है. हां एक बात ये भी है कि टूरिस्ट प्लेस में थोड़ी बहुत जेब ढीली तो हो जाती है. पर उसकी चिंता मत करिए अगर मूड फ्रेश करना है और लॉकडाउन में बोर हो गए हैं और कोई शांत जगह तलाश रहे हैं तो लैंसडौन से अच्छी जगह कोई हो ही नहीं सकती, यहां आकर आप खुद से मिलेंगे.

मेरा अनुभव
टेंशन हर किसी की लाइफ का हिस्सा होती है. पर मैं कुछ ज्यादा परेशान हो गई थी पर जब लैंसडौन गई तो यहां आकर मेरी सोच ही नहीं बल्कि मेरा नजरिया भी बदला. सबसे अच्छी बात ये हुई कि मुझे खुद से मिलने का मौका मिला और अब अगर मुझे मौका मिलेगा तो फिर से लैंसडौन जाना चाहूंगी. तो अगर आप भी शहरों की आपाधापी में कई खो गए हैं तो एक बार लैंसडौन की सैर जरूर करें.

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