रविवार की शाम कानपुर की सड़कों पर आम दिनों जैसी ही चहल-पहल थी। लोग अपने काम से लौट रहे थे, कुछ बाजार की ओर जा रहे थे और कुछ दोस्त आपस में बातचीत करते हुए आगे बढ़ रहे थे। तभी अचानक पॉश इलाके ग्वालटोली थाना क्षेत्र के रेव थ्री के पास तेज इंजन की गड़गड़ाहट सुनाई दी। कुछ ही सेकेंड में एक चमचमाती लेम्बोर्गिनी कार बिजली की रफ्तार से सामने आई और पीछे से एक बुलेट को जोरदार टक्कर मार दी। बुलेट पर तीन लोग सवार थे, जो सड़क पर गिर पड़े। इस हादसे ने पल भर में सड़क का नजारा बदल दिया। जहां कुछ देर पहले सामान्य ट्रैफिक था, वहां चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। लोग मदद के लिए दौड़े, किसी ने एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की तो कोई घायलों को संभालने में जुट गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी तेज थी कि बुलेट कई फीट दूर जा गिरी और उसके सवार गंभीर रूप से घायल हो गए।
नशे में धुत रईसजादा, भागने की कोशिश में और बड़ा हादसा
हादसे के बाद उम्मीद थी कि कार चालक तुरंत गाड़ी रोकेगा और घायलों की मदद करेगा, लेकिन यहां कहानी ने और खतरनाक मोड़ ले लिया। लेम्बोर्गिनी चला रहा युवक नशे में धुत बताया जा रहा था। उसने गाड़ी रोकने के बजाय मौके से भागने की कोशिश की। तेज रफ्तार और घबराहट में कार अनियंत्रित हो गई और सीधे सड़क के डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर के बाद कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। तभी लोगों को पता चला कि कार चला रहा युवक कोई आम शख्स नहीं बल्कि तंबाकू कारोबारी का बेटा है। उसकी पहचान शिवम मिश्रा के रूप में हुई, जिसके पिता केके मिश्रा कानपुर और दिल्ली में बड़े कारोबारी बताए जाते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि शिवम शराब के नशे में था और सड़क पर ऐसे गाड़ी चला रहा था मानो पूरी सड़क उसी की जागीर हो। लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा और डर दोनों साफ नजर आ रहे थे।
बाउंसरों की मौजूदगी ने बढ़ाया तनाव
हादसे के कुछ ही देर बाद एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। शिवम मिश्रा की लेम्बोर्गिनी के पीछे एक दूसरी कार भी चल रही थी, जिसमें उसके बाउंसर सवार थे। आमतौर पर सुरक्षा के लिए मौजूद ये बाउंसर इस बार लोगों के गुस्से का निशाना बन गए। जैसे ही भीड़ ने देखा कि हादसे के बाद भी आरोपी बचने की कोशिश कर रहा है, गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने लेम्बोर्गिनी के शीशे तोड़ दिए और शिवम को बाहर निकाला। इसी दौरान पीछे से पहुंचे बाउंसरों ने भीड़ को धमकाने और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इससे माहौल और बिगड़ गया। कुछ देर के लिए ऐसा लगा कि स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो जाएगी। हालांकि भीड़ की संख्या ज्यादा होने के कारण बाउंसरों की एक न चली। लोग सवाल उठा रहे थे कि क्या पैसा और रसूख सड़क पर कानून से ऊपर हो गया है। आम नागरिकों में यह डर भी दिखा कि अगर समय रहते लोग न जुटते, तो शायद मामला दबा दिया जाता।
पुलिस जांच और उठते सवाल, क्या मिलेगा इंसाफ
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने क्षतिग्रस्त गाड़ियों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। शिवम मिश्रा को हिरासत में लेकर मेडिकल जांच कराई जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि वह नशे में था या नहीं। इस हादसे ने एक बार फिर शहर में अमीरजादों की लापरवाही और सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक तेज रफ्तार, नशा और रसूख के दम पर कानून को कुचला जाता रहेगा। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर गुस्सा देखने को मिल रहा है। आम लोगों की मांग है कि आरोपी के साथ सख्त कार्रवाई हो और घायलों को न्याय मिले। यह हादसा सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं, बल्कि सिस्टम और समाज दोनों के लिए चेतावनी बनकर सामने आया है कि अगर समय रहते सख्ती नहीं हुई, तो ऐसी सनकें और जिंदगियां लीलती रहेंगी।

