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3 दिन पहले हुई थी भाई की मौत, अब फेमस थियेटर आर्टिस्ट ने दुनिया को कहा अलविदा, छाया मातम

देशभर में कोरोना वायरस ने हड़कंप मचाया हुआ है, कोरोना के कारण पूरे विश्व में कई लाखों लोगों की मौत हो चुकी है. अब जो खबर सामने आई है उससे बॉलीवुड में मातम छा गया है. हाल ही में बंगाल की दिग्गज थियेटर आर्टिस्ट (Theater Artist) उषा गांगुली (Usha Ganguly) का निधन हो गया. निधन की खबर से सिर्फ बंगाली इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि बॉलीवुड में भी शोक की लहर है. उषा गांगुली ने अपने दक्षिण कोलकाता (South Kolkata) के घर में ही आखिरी सांस ली.

75 साल की उम्र में निधन
उषा गांगुली के परिवार के मुताबिक, गुरुवार की सुबह करीब 7 बजे उनके घर काम करने वाली मेड को 75 साल की उषा गांगुली बेहोश अवस्था में फर्श पर मिली. जिसकी जानकारी मेड ने उनके पड़ोसियों को दी.usha deathक्योंकि, उषा शहर के लेक गार्डेन्स इलाके में स्थित अपने फ्लैट में अकेले ही रहती थीं. ऐसे में जब पड़ोसियों ने डॉक्टर को बुलाया तो पता चला कि, दिल का दौरा पड़ने की वजह से कुछ देर पहले उनकी मौत हो गई थी.

3 दिन पहले हुआ था भाई का निधन
बताते चलें कि, गुरुवार को उषा गांगुली की मौत से 3 दिन पहले ही गांगुली के भाई का निधन हो गया था. उषा का एक बेटा है और उनके पति कमलेन्दु की पहले ही मौत हो चुकी थी. कहा जा रहा है कि, अकेले रहने और भाई की मौत के सदमे की वजह से उन्हें हार्टअटैक आया होगा और उनकी मौत हो गई. फिलहाल इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता.

रंगमच जीवन और रंगकर्मी परिवार
बंगाल की जानी मानी थियेटर आर्टिस्ट उषा गांगुली (Usha Ganguly) ने 1976 में रंगकर्मी समूह की स्थापना की थी. यह समूह में महाभोज, लो‍क कथा, होली, कोर्ट मार्शेल, रुदाली, मुक्ति, शोभायात्रा, काशीनामा, मानसी (बंगाली में) जैसे नाटकों के लिए प्रचलित है.

usha ganguli उषा गांगुली एक ऐसी आर्टिस्ट थीं जिन्होंने बंगाल (Bangal) में वैकल्पिक हिंदी रंगमंच को अपनी मेहनत के दम पर पहचान दिलाई थी. वह अपने काम से इतना प्रेम करती थीं कि, वह रंगमच को ही अपना जीवन और रंगकर्मी को अपना परिवार मानती थीं.

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