कॉमेडी और बातचीत से भरपूर The Great Indian Kapil Show के लेटेस्ट एपिसोड में इस बार मनोरंजन नहीं, बल्कि शिक्षा और संघर्ष की कहानी छाई रही। शो में मशहूर शिक्षक खान सर, अलख पांडे और नितिन विजय नजर आए। हंसी-मजाक के बीच जब कपिल शर्मा ने खान सर से पूछा कि उन्होंने 107 करोड़ रुपये का ऑफर क्यों ठुकराया, तो स्टूडियो में सन्नाटा छा गया। यह सिर्फ पैसों का सवाल नहीं था, बल्कि सोच और सिद्धांत का भी था। खान सर ने मुस्कुराते हुए जो जवाब दिया, उसने दर्शकों को भावुक कर दिया।
संघर्ष भरे दिनों की याद और ट्रेन के दरवाजे की कहानी
खान सर ने बताया कि जब वे छात्र थे, तब उनके पास इतने पैसे नहीं होते थे कि वे आराम से कोचिंग या यात्रा कर सकें। कोटा जैसे शहरों में पढ़ाई का सपना था, लेकिन जेब खाली रहती थी। उन्होंने याद किया कि कई बार ट्रेन में बिना आरक्षित टिकट के सफर करना पड़ता था। डर लगता था कि कहीं जुर्माना न लग जाए, इसलिए दरवाजे पर बैठकर सफर पूरा करते थे। उन्होंने कहा कि उस दौर ने उन्हें सिखाया कि हर छात्र के पास संसाधन नहीं होते, लेकिन सपने सबके बड़े होते हैं। महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस सुनकर ही हिम्मत टूट जाती थी। ऐसे में उन्होंने ठान लिया कि अगर कभी मौका मिला तो वे शिक्षा को आसान और सस्ती बनाएंगे।
महंगे कोचिंग मॉडल पर सवाल और 107 करोड़ का सच
जब शो में अर्चना पूरन सिंह ने पूछा कि आखिर उन्हें इतनी बड़ी रकम का ऑफर क्यों दिया गया था, तो खान सर ने साफ कहा कि कुछ बड़े संस्थान चाहते थे कि वे उनके साथ जुड़ जाएं। उनका मानना था कि अगर खान सर का नाम जुड़ जाएगा तो वे फीस कई गुना बढ़ा सकते हैं। यह पूरी तरह ब्रांड वैल्यू का खेल था। खान सर ने कहा कि वे जानते थे कि उनके नाम का इस्तेमाल करके छात्रों से ज्यादा फीस वसूली जाएगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो कंपनी उन्हें यह ऑफर दे रही थी, वह आज बंद हो चुकी है। इसी दौरान उन्होंने एक पंक्ति कही जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई—“जब रावण का साम्राज्य टिक नहीं सका, तो 107 करोड़ रुपये क्या मायने रखते हैं।” इस एक वाक्य ने साफ कर दिया कि उनके लिए सिद्धांत पैसे से ऊपर हैं।
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छात्रों के लिए लिया फैसला, नहीं भूले अपने जख्म
खान सर ने आगे कहा कि वे आज भी अपने पैरों के उन जख्मों को नहीं भूले हैं, जो संघर्ष के दिनों में लगे थे। उन्हें पता है कि आज भी हजारों छात्र ऐसे हैं जो महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मतलब सिर्फ पैसा कमाना नहीं, बल्कि समाज को बेहतर बनाना है। अगर वे 107 करोड़ रुपये के लालच में आ जाते, तो शायद वे उसी सिस्टम का हिस्सा बन जाते, जिसे वे बदलना चाहते थे। उनका मानना है कि प्रीमियम शिक्षा का मतलब ऊंची फीस नहीं, बल्कि अच्छी गुणवत्ता और समर्पण होना चाहिए। शो के दौरान मौजूद अन्य शिक्षकों ने भी इस सोच की सराहना की। दर्शकों के लिए यह एपिसोड सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक कहानी बन गया।
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