90 के दशक को हिंदी सिनेमा का गोल्डन पीरियड कहा जाता है। इस दौर में फिल्में, संगीत और खासकर हीरोइनों का जलवा चरम पर था। एक ओर माधुरी दीक्षित जैसी अदाकारा थीं, जिन्हें उनके शानदार डांस, एक्सप्रेशन और स्क्रीन प्रेजेंस के कारण ‘डांसिंग क्वीन’ कहा जाने लगा था। ‘दिल’, ‘बेटा’, ‘साजन’ और ‘खलनायक’ जैसी फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया। दूसरी ओर इंडस्ट्री में कई ऐसी अभिनेत्रियां भी थीं, जो अपनी अलग पहचान बनाने के लिए लगातार प्रयोग कर रही थीं। उस समय एक हिट गाना किसी भी एक्ट्रेस के करियर की दिशा बदल सकता था, लेकिन यही गाने कई बार विवाद और आलोचना का कारण भी बन जाते थे। 1993 में आया ‘चोली के पीछे क्या है’ इसका सबसे बड़ा उदाहरण रहा, जिसने लोकप्रियता के साथ-साथ अश्लीलता की बहस को भी जन्म दिया।
मिस इंडिया से बॉलीवुड तक का सफर
इसी दौर में एक ऐसी एक्ट्रेस भी थीं, जिन्होंने मिस इंडिया का खिताब जीतकर फिल्मों में कदम रखा और पहली ही फिल्म से दर्शकों का दिल जीत लिया। ये कोई और नहीं बल्कि जूही चावला थीं। 1988 में बॉलीवुड में एंट्री करने वाली जूही अपनी मासूम शक्ल, नेचुरल एक्टिंग और प्यारी मुस्कान के लिए जानी जाती थीं। शुरुआती सालों में उन्होंने रोमांटिक और फैमिली फिल्मों में काम किया और खुद को एक सॉफ्ट इमेज वाली हीरोइन के रूप में स्थापित किया। लेकिन 1994-95 के आसपास उनका करियर थोड़ी मुश्किलों से गुजरने लगा। लगातार कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा पा रही थीं। ऐसे में जूही ने अपने करियर को बचाए रखने के लिए ऐसे प्रोजेक्ट्स चुने, जो चर्चा में आ सकें, भले ही वो विवादों से जुड़े क्यों न हों।
दो साल, तीन गाने और कई सवाल
1994 में रिलीज हुई फिल्म ‘अंदाज’ जूही चावला के करियर का एक अहम मोड़ साबित हुई। डेविड धवन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अनिल कपूर और करिश्मा कपूर भी अहम भूमिकाओं में थे। फिल्म का संगीत बप्पी लाहिरी ने दिया था और यहीं से विवादों की शुरुआत हुई। फिल्म के कुछ गानों के बोल जैसे ‘लैला बिचारी क्या करती’ और ‘ये मालगाड़ी तू’ को डबल मीनिंग माना गया। इन गानों पर जूही के डांस ने खूब सुर्खियां बटोरीं। हैरानी की बात यह रही कि महज दो साल के भीतर जूही ने ऐसे तीन गानों पर परफॉर्म किया, जिन्हें लेकर सवाल उठे। उस दौर में जब ‘चोली के पीछे क्या है’ को लेकर पूरा देश बहस कर रहा था, तब जूही के ये गाने भी लोकप्रियता के मामले में पीछे नहीं रहे और कई बार तुलना का विषय बने।
आलोचना के बीच कायम रही स्टार पावर
हालांकि इन गानों की वजह से जूही चावला को आलोचना का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी स्टार पावर पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ा। ‘अंदाज’ भले ही बॉक्स ऑफिस पर औसत रही हो, लेकिन इसके गाने आज भी म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर सुने जाते हैं। जूही ने बाद में समझदारी से अपने करियर की दिशा बदली और ‘डर’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘यस बॉस’ और ‘कभी हां कभी ना’ जैसी फिल्मों से खुद को एक बार फिर मजबूत साबित किया। 90s की ये कहानी बताती है कि उस दौर में एक्ट्रेसेस को सिर्फ ग्लैमर ही नहीं, बल्कि जोखिम भी उठाने पड़ते थे। जूही चावला की यही हिम्मत और संतुलन उन्हें आज भी यादगार बनाता है।
