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पैसे न होने की वजह से दर-दर भटका था फराह का परिवार, पिता के अंतिम संस्कार के लिए करना पड़ा था ऐसा काम

बॉलीवुड के कई सितारे ऐसे हैं, जो आज के समय में अपनी एक अलग ही पहचान बना चुके हैं. इस समय इंडस्ट्री में ही नहीं बल्कि लोगों उन्हें बाहर के लोग भी जानते हैं. इनमें से एक नाम फराह खान का भी आता है. जो आज के समय में मानी-जानी कोरियोग्राफर हैं. शाहरूख और सलमान दोनों ही कैंप में अपनी मौजूदगी रखने वाली फराह ने अपने करियर की शुरूआत बतौर कोरियोग्राफर की थी. इसके बाद धीरे-धीरे फराह ने डायरेक्शन में दिलचस्पी दिखाई. इतना ही नहीं फराह ने शाहरूख के साथ फिल्म ‘मैं हू ना’ और ‘ओम शांति’ ओम जैसी बड़ी फिल्में भी की. लेकिन उनकी पर्सनल जिंदगी की बात करें तो उनके सामने कई ऐसे मोड़ आए, जो संघर्ष से भरे थे.

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बॉलीवुड परिवार से थी फराह
फराह खान के बैकग्राउंड की बात करें तो शुरू से ही एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से तालुकात रखती हैं. लेकिन अपनी जिंदगी के सफर में ऊंचाईयों और कामयाबी को हासिल करने के लिए उन्हें कौन-कौन से दिन देखने पड़ेंगे ये शायद फराह को अंदाजा भी नहीं था. फराह उस परिवार से थीं, जिसने फिल्म इंडस्ट्री में खूब नाम कमाया था. वो चाहे डेजी इरानी हो या फिर हनी इरानी उनकी मौसी हों. farah khan familyइसके साथ ही फरहान अख्तर और जोया अख्तर उनके कजिन हैं, जिसके बारे में सभी को पता है और साजिद खान फराह के छोटे भाई हैं. बता दें कि फराह के पिता कामरान खान स्टंटमैन थे. लेकिन आगे बढ़ने के साथ उनकी च्वाइस भी बदली और उन्होंने फिल्म मेकिंग का काम शुरू किया था. साल 1971 की बात है जब फराह के पिता ने एक फिल्म बनाई थी, इसका नाम ‘ऐसा भी होता है’ था.

बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई फिल्म
इस फिल्म को बनाते समय फराह के पिता को काफी सारी उम्मीदें थीं. उन्हें ऐसा लग रहा था कि जैसे फिल्म से काफी पैसा आने वाला है. लेकिन उस समय इस सोच के बिलकुल अपोजिट हुआ, और बॉक्स ऑफिस पर फिल्म फ्लॉप साबित हुई. फिल्म के पिटने के साथ फराह का पूरा परिवार आर्थिक तंगी के बोझ तले दबने लगा. जो कुछ घर में बचा-खुचा था वो भी कर्ज के नाम पर चला गया. मानों एक झटके में फराह का पूरा परिवार सड़क पर आ गया. दिन-ब-दिन घर के हालात खराब होने लगे. farah khan familyइसके बाद टेंशन में आकर फराह के पिता कामरान ने शराब का हाथ थाम लिया. इसके बाद घर में क्लेश होने लगा जिससे तंग आकर फराह की मां ने भी घर छोड़ दिया. इसके बाद इस परिवार को चलाने के लिए हनी इरानी (फराह की मौसी) ने कुछ पैसे देने शुरु किए. लेकिन उस समय फराह के पिता इतना शराब पीने लगे थे कि उनकी हालत हर दिन खराब होती जा रही थी. एक समय आया जब वो पूरी तरह से बीमार पड़ गए. लेकिन आर्थिक तंगी ने परिवार पर ऐसा वार किया था कि पिता के लिए इलाज के लिए घर में फूटी कौड़ी भी नहीं थी. इसके बाद अचानक से ही खबर आई कि फराह और साजिद के पिता का निधन हो गया.

पिता के दाह-संस्कार के लिए नहीं फूटी कौड़ी
आपको ये बात जानकर हैरानी होगी जब फराह के पिता का निधन हुआ तो उनके अंतिम संस्कार के लिए पैसे के नाम से पिता की जंब से सिर्फ तीन रूपये मिले थे. इस दौरान आनन-फानन में किसी तरह फराह और भाई साजिद ने आस-पड़ोस के लोगों से मदद मांगी और फिर जाकर अपने पिता का दाह-संस्कार किया. farah khan familyइस बारे में फराह खान कहती हैं कि ये वो दिन था जो उनकी जिंदगी का सबसे बुरा दिन था. जिसने उन्हें पैसे की कीमत समझाई, बताया कि मेहनत करके उन्हें खूब पैसा कमाना है और भविष्य बनाना है.

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