दूरदर्शन के दौर में जिस चेहरे को करोड़ों लोगों ने भगवान श्रीराम मानकर पूजा, उसी अरुण गोविल की ज़िंदगी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा है, जिसे जानकर लोग आज भी हैरान रह जाते हैं। पर्दे पर मर्यादा, संयम और त्याग का प्रतीक बने अरुण गोविल असल ज़िंदगी में कभी चेन स्मोकर थे। लेकिन एक आम फैन की भावनाओं और डांट ने उन्हें ऐसा झकझोरा कि उन्होंने उसी दिन सिगरेट को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। यह घटना न सिर्फ उनकी निजी ज़िंदगी का टर्निंग पॉइंट बनी, बल्कि यह भी दिखाती है कि दर्शकों की आस्था किसी कलाकार को किस हद तक बदल सकती है।
दूरदर्शन का दौर और भगवान बन चुका एक कलाकार
अरुण गोविल का नाम सुनते ही आज भी लोगों के मन में दूरदर्शन की ‘रामायण’ की छवि उभर आती है। रामानंद सागर के इस ऐतिहासिक धारावाहिक ने 80 के दशक में ऐसा जादू चलाया कि सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था और लोग टीवी के सामने दीप जलाकर बैठते थे। अरुण गोविल ने प्रभु श्रीराम के किरदार को इतनी सादगी, गंभीरता और आत्मिक गहराई के साथ निभाया कि दर्शकों के लिए वे केवल एक अभिनेता नहीं रहे, बल्कि आस्था का प्रतीक बन गए।
शो की लोकप्रियता का आलम यह था कि लोग उन्हें देखकर पैर छूते, “राम-राम” कहकर बुलाते और कई जगहों पर उनकी तस्वीरों की पूजा तक की जाती थी। इस छवि ने अरुण गोविल की निजी ज़िंदगी पर भी गहरा असर डाला, क्योंकि लोग उनसे हर पल वही आदर्श व्यवहार देखने की उम्मीद करते थे, जो उन्होंने पर्दे पर दिखाया था।
फिल्मों से टीवी तक का सफर: पहचान बनने से पहले की कहानी
बहुत कम लोग जानते हैं कि अरुण गोविल ने अपने करियर की शुरुआत टीवी से नहीं, बल्कि फिल्मों से की थी। 1977 में उन्होंने ताराचंद बड़जात्या की फिल्म ‘पहेली’ से अभिनय की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद ‘सावन को आने दो’, ‘हिम्मतवाला’, ‘दिलवाला’ और ‘लवकुश’ जैसी फिल्मों में काम किया। उन्होंने श्रीदेवी जैसी बड़ी अभिनेत्री के साथ भी स्क्रीन शेयर की, लेकिन वह पहचान नहीं मिली, जो एक कलाकार चाहता है।
टीवी पर रामानंद सागर के ‘विक्रम और बेताल’ में राजा विक्रमादित्य का किरदार निभाने के बाद उनकी अभिनय क्षमता पर निर्देशक को पूरा भरोसा हो गया। यही भरोसा आगे चलकर ‘रामायण’ की नींव बना। दीपिका चिखलिया (सीता) और सुनील लहरी (लक्ष्मण) के साथ उनकी केमिस्ट्री ने इस शो को ऐतिहासिक बना दिया और अरुण गोविल को घर-घर में भगवान राम के रूप में स्थापित कर दिया।
जब भगवान राम को सिगरेट पीते देख गुस्से में आ गया फैन
रामायण की अपार सफलता के बाद अरुण गोविल जहां भी जाते, लोग उन्हें भगवान की तरह सम्मान देते थे। लेकिन इसी छवि के कारण उनकी निजी आदतें भी लोगों की नजरों में आने लगीं। अरुण गोविल खुद स्वीकार कर चुके हैं कि एक समय वे दिन में कई-कई सिगरेट पीते थे।
कपिल शर्मा शो में उन्होंने एक घटना का ज़िक्र किया था, जिसने उनकी ज़िंदगी बदल दी। साउथ इंडिया में किसी तमिल फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें सिगरेट की तलब लगी और वे एक कोने में जाकर सिगरेट पीने लगे। तभी एक शख्स उन्हें घूरता हुआ आया और तमिल में कुछ गुस्से में कहने लगा। अरुण को भाषा समझ नहीं आई, लेकिन बाद में पता चला कि वह फैन कह रहा था, “हम आपको भगवान मानते हैं और आप सिगरेट पी रहे हो?”
उस फैन की भावनाओं ने अरुण गोविल को अंदर तक झकझोर दिया। उन्होंने महसूस किया कि लोग उनसे सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि आदर्श जीवन की भी उम्मीद करते हैं।
एक डांट, एक फैसला और नई ज़िंदगी की शुरुआत
उस एक घटना के बाद अरुण गोविल ने तुरंत फैसला लिया कि वे सिगरेट को हमेशा के लिए छोड़ देंगे। उन्होंने इसे अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बताया। उनके लिए यह सिर्फ एक बुरी आदत छोड़ने का फैसला नहीं था, बल्कि उस छवि के प्रति सम्मान था, जो लोगों ने उन्हें दी थी।
आज भी अरुण गोविल जब सार्वजनिक जगहों पर दिखाई देते हैं, तो लोग उनके पैर छूते हैं और आदर से बात करते हैं। उनका मानना है कि रामायण ने उन्हें सिर्फ लोकप्रियता नहीं दी, बल्कि जिम्मेदारी भी सौंपी। एक कलाकार के तौर पर नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर बेहतर बनने की प्रेरणा दी। यही वजह है कि दशकों बाद भी लोग उन्हें सिर्फ अरुण गोविल नहीं, बल्कि अपने मन का ‘श्रीराम’ मानते हैं।
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