क्या सुप्रीम कोर्ट निर्माण उद्योग पर मेहरबानी होगी? इसका फैसला तो कल ही होगा

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5 दिसंबर..ये वो दिन रहेगा, जब दिल्ली एनसीआर के लोगों की एक बड़ी जमात की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी रहेगी, चुंकि इस दिन एक महीने से अधिक समय से निर्माण व तोड़फोड़ के कार्य पर लगी रोक को लेकर कोर्ट फैसला सुनाने जा रहा है। वहीं, कोर्ट का फैसला आने से पहले निर्माण कार्य से जुड़े लोग इस बात को साफ कर चुके हैं कि अगर निर्माण कार्य से रोक नहीं हटाया गया, तो एक बड़ा वर्ग आंदोलन कर सकता है, लिहाजा आने वाली 5 दिसंबर यानी की कल के फैसले को लेकर सभी में उत्साह बरकरार है। ये भी पढ़े :दिल्ली नहीं बल्कि UP के लोग झेल रहे हैं प्रदूषण की मार, टॉप-10 की लिस्ट में शामिल हुए 7 शहर

यहां हम आपको बता दें कि निर्माण कार्य में लगी रोक को लेकर न महज बड़े पैमाने पर लोग बेरोजगारी के चपेट में आए हैं, अपितु निर्माण उद्योग सहित बिल्डिंग मटीरियल सप्लायर, स्टील इंडस्ट्री, इंजीनियर्स आदि के बिजनेस चौपट हैं। निर्माण कार्य पर लगे लोगों का असर वर्तमान में 30 से 35 लाख लोगों पर साफ-साफ देखा जा सकता है। शॉप चलाने वाले लोग अपने यहां लोगों को कम करने काम कर रहे हैं।

गौरतलब है कि निर्माण उद्योग पर रोक दिल्ली में बढ़ते भयावह प्रदूषण को मद्देनजर रखते हुए उठाया गया है, मगर निर्माण उद्योग बचाओ मोर्चा से जुडे़ और क्रेडाई के सदस्य हर्ष बंसल ने कहा कि हमारे इस उद्योग से महज 10 फीसद ही प्रदूषण होता है, जबकि इस सेक्टर में कई ऐसे काम है, जिनकी प्रदूषण बढ़ाने में भूमिका महज शुन्य फीसद है। इनमें शटरिंग, सरिया बांधने का काम, ब्लॉक वर्क, लकड़ी फर्निशिंग, टाइल्स, पेंट, सेनेटरी फिटिंग, इलेक्ट्रिक काम, एसी फिटिंग, आग निरोधक यंत्र लगाना, बिल्डिंग ले आउट, फैब्रिकेटर आदि।

इसके साथ ही निर्माण उद्योग से जुड़े अनिल यादव का कहना है कि ग्रेप को लागू कर रखा है, जब प्रदूषण अपने चरम पर है तो हम अपने उद्योग को बंद करने के लिए तैयार हैं। अब तो हमारे पास महज 10 फीसद ही मजदूर हैं। अब ऐसे में दोबारे से काम की शुरूआत करते हैं तो सबकुछ पटरी पर लाने में बहुत समय लगेगा, और वैसे भी अब ठंड आने वाले ही। ठंड को ध्यान में रखते हुए सभी मजदूर अपने गांव रवाना हो चुके हैं। ऐसे में विरले ही मजदूर मिलेंगे। अब दिसंबर का महीना आने वाला है। गुजरते वक्त के साथ ठंड भी अपने यौवन पर पहुंच जाएगा, जो कई तरीकों से हमारे इस उद्योग को भी अपनी चपेट में ले सकता है।

वहीं, इस उद्योग से जुड़े प्रवीण कुमार का कहना है कि 50 हजार मजदूर पलायन कर चुके हैं और हमारे पास, जो स्थायी कर्मचारी है। उन्हें तो हर माह वेतन देना होता है। अब अगर काम नहीं चलेगा तो हम उन्हें वेतन कहां से देंगे? निर्माण कार्यों पर लगे रोक के कारण व्यापक बेरोजगारी की चपेट में लोग आ चुके हैं। अब ऐसे में 5 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट निर्माण कार्य को लेकर क्या फैसला देता इस दिल्ली एनसीआर की लोगों की खास निगाहें टिकी हुई है।

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