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Bumper To Bumper Insurance: अब वो लोग जो नई गाड़ी खरीदना चाह रहे हैं, उनके लिए एक बड़ी खबर हैं. अब ऐसे ग्राहकों पर इंश्योरेंस का बड़ा भार नहीं सहना पड़ेगा. असल में , अब नई गाड़ी पर 5 साल बंपर-टू-बंपर इंश्योरेंस जरूरी नहीं किया गया है. मद्रास हाई कोर्ट ने बोला है कि नई गाड़ी खरीदने पर 5 साल का बंपर टू बंपर इंश्योरेंस अभी जरूरी नहीं किया जाेगा. जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के संगठन, ऑटो कंपनियां , इंश्योरेंस एजेंट्स के संगठन की दलीलों को मानते हुए मद्रास हाई कोर्ट 4 अगस्त के अपने ऑर्डर में बदलाव करे और 5 साल के लिए एक साथ इंश्योरेंस जरूरी शर्त को हटा दिया जाएगा.

मद्रास हाई कोर्ट ने कही ये बात

कोर्ट ने आज हुई सुनवाई में ये स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सिर्फ पैसेंजर की सुरक्षा है. कोर्ट ने अपने ऑब्जरवेशन में ये बोला कि पुराने ऑर्डर में कोर्ट के सुझावों को सम्मिलित किया जाएगा और जरूरी नियमों को कानून बनाने वाली संसद पर छोड़ दिया जाएगा. इसका मतलब है कि अब बंपर टू बंपर इंश्योरेंस का आर्डर रुक गया है.

गौरतलब है कि अब नई गाड़ी की खरीद पर 5 साल तक जरूरी बंपर टू बंपर इंश्योरेंस लिये जाने पर गाड़ियों की कीमत 50,000 रुपये से लेकर 200000 रुपये तक बढ़ रही थी इस बात का विरोध ऑटो कंपनियों ने किया था. अब मद्रास हाई कोर्ट ने इस पर अपना फैसला सुना डाला है.अगस्त के ऑर्डर को मद्रास हाई कोर्ट मोडिफाइड करेगा.

कोर्ट ने सुझाव की करी मांग

कोर्ट के हिसाब से , बंपर टू बंपर इंश्योरेंस पर कोर्ट का ही सिर्फ सुझाव रहेगा, इसे जरूरी करने का नियम संसद पर छोड़ा जाएगा. गौरतलब है कि नियम लागू करने की चुनौती पर 1 सितंबर को कोर्ट ने कई सुझाव मांगे थे. जिसके बाद, ऑटो कंपनियां , आईआरडीए समेत कई संगठनों ने मद्रास हाई कोर्ट के समझ अपने-अपने सुझाव पेश किये गये थे.

ज्ञात हों कि नई गाड़ी की खरीद पर अगस्त में 5 साल का बंपर टू बंपर इंश्योरेंस करने का आर्डर पास कर दिया गया था. लेकिन इसके बाद, लगातार ऑटो कंपनियों ने भी इसका विरोध किया था, ऐसा इसलिए क्योंकि एक साथ 5 साल के इंश्योरेंस को लागू करना एक बड़ी चुनौती थी.

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