नई दिल्ली। सरकार ने सोया तेल और सनफ्लावर तेल पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया है, इससे पहले सरकार ने क्रूड पाम ऑयल पर भी इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती की थी, अब देखा जाए तो सारे टैक्स मिलाकर प्रभाव ड्यूटी कटौती 8.25 परसेंट हो चुकी है। कुल ड्यूटी 38-50 परसेंट से घटकर 30-25 परसेंट पर आ चुकी है। कुल ड्यूटी में एग्री सेस और सोशल वेलफेयर सेस भी सम्मिलित किया गया है। इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती का सीधा फायदा आम लोगों के रसोई घर के बजट पर पड़ेगा, हालांकि इम्पोर्ट ड्यूटी में ये कटौती 30 सितम्बर तक के लिए ही है, अभी सरकार सालाना 1.5 करोड़ टन खाने के तेल का इम्पोर्ट करती है, जिस पर करीब 70 हजार करोड़ रुपये का खर्च आता है, जबकि देश की सालाना खपत 2.5 करोड़ टन खाने के तेल की है।

भारत में मलेशिया व इंडोनीशिया दोनों ही देशों से पाम ऑयल का आयात किया जाता है। भारत ने पिछले साल 72 लाख टन पाम ऑयल मलेशिया और इंडोनेशिया से मंगवाया था, कुल आयात में पाम तेल की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत है। 34 लाख टन सोया तेल का इम्पोर्ट ब्राजील और अर्जेंटीना से और 25 लाख टन सनफ्लावर ऑयल को इम्पोर्ट रूस और यूक्रेन से हुआ। इससे पहले केंद्र की मोदी सरकार ने बीते बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में पाम ऑयल मिशन की योजना को मंजूरी दी। खाद्य तेलों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने 11 हजार 040 करोड़ रुपए के पाम ऑयल मिशन का ऐलान किया।

सरकार ने ये कदम भारत को खाने के तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया है। सरकार के इस मिशन से पाम ऑयल के इम्पोर्ट पर निर्भरता घटेगी और किसानों की आय भी बढ़ने का रास्ता साफ होगा, साथ ही साथ ऑयल इंडस्ट्री के कारोबारियों को भी लाभ मिलेगा। वहीं कैबिनेट की बैठक में ये भी फैसला हुआ कि अगर बाजार में उतार चढ़ाव आया और किसान की फसल का मूल्य कम हुआ तो जो अंतर की राशि है वो केंद्र सरकार DBT के माध्यम से किसानों को भुगतान करेगी। खेती की सामग्री में जो पहले राशि दी जाती थी उस राशि में भी बढ़ोतरी की गई है।

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