देश की इन 3 बड़ी सरकारी बैंकों का हो सकता है निजीकरण! जानें ग्राहकों पर कितना पड़ेगा असर

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देशभर में कोरोना संकट के बीच बैंक से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है, दरअसल नीति आयोग ने केंद्र सरकार को सुझाव देते हुए कहा है कि वह तीन पब्लिक सेक्टर बैंकों का निजीकरण कर दे. जिससे कि देश की अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर खड़ी हो सके. बताया जा रहा है कि नीति आयोग की तरफ से जिन बैंकों का निजीकरण करने की सलाह दी गई है, उनमें पंजाब एंड सिंध बैंक, यूको बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र है. इतना ही नहीं इन सरकारी बैंकों के निजीकरण के साथ सभी ग्रामीण बैंकों के मर्जर का भी सुझाव दिया गया है. इसके साथ ही (NBFC) गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी को अधिक छूट देने की बात कही जा रही है।

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इसको लेकर पीएम मोदी ने बैंकों और एनबीएफसी के प्रमुखों के साथ बैठक भी की थी और बैंकिंग सेक्टर को फिर से पटरी पर लाने के उपायों पर चर्चा भी की गई थी।

पीएम मोदी की एनबीएफसी के प्रमुखों के साथ हुई बैठक में आधे से भी अधिक पब्लिक सेक्टर बैंकों के प्राइवेटाइजेशन की योजना बनाने पर जोर दिया है. बताया जा रहा है कि भारत सरकार इनकी संख्या घटाकर 5 पर ले आया जाए. इसकी

शुरुआत बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब एंड सिंध बैंक के अपने शेयर्स बेचने से हो सकती है.

इन सबके बीच सबसे अहम और बड़ा सवाल यह है कि अगर देशभर में इन सरकारी बैंकों का निजीकरण हो जाएगा उससे ग्राहकों का नुकसान होगा या फायदा?. तो इस पर एसकोर्ट सिक्योरिटी के रिसर्च हेड आसिफ इकबाल बताते हैं कि इस फैसले से ग्राहकों पर कोई भी खास असर नहीं होगा. क्योंकि बैंक की सेवाएं पहले की तरह ही बरकरार रहती है।

मालूम हो कि पिछले साल आईडीबीआई बैंक में भी हिस्सेदारी LIC को बेच दी थी. इसके बाद से ये बैंक प्राइवेट हो गया है. IDBI एक सरकारी बैंक था, जो 1964 में देश में बना था. LIC ने IDBI में 21000 करोड़ रुपये का निवेश करके

51 फीसदी हिस्सेदारी ख़रीदी थी. इसके बाद LIC और सरकार ने मिलकर 9300 करोड़ रुपये IDBI बैंक को दिये थे. इसमें एलआईसी की हिस्सेदारी 4,743 करोड़ रुपये थी।

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