वित्त मंत्री का खुलासा, बताया- संकट में हैं ये कई बड़े बैंक, जल्द लागू होगा नया कानून

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These many banks in crisis

कोरोना काल में बैंक से जुड़े ग्राहकों की दिक्कतों को देखते हुए हाल ही में केंद्र की ओर से मानसून सत्र (Monsoon Session) में संशोधन विधेयक (Amendment Bill) को लोकसभा में पेश किया गया है. इस बारे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने बात करते हुए संसद के निचले सदन में बताया है कि केंद्र सरकार बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट, 1949 (Banking Regulation Act, 1949) के तहत इसमें संशोधन करके बैंक ग्राहकों की सुविधा को सुनिश्चित करना चाहती है.

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इसके आगे उन्होंने संशोधन के बारे में बात करते हुए कहा कि जब कोई बैंक किसी दिक्कत का सामना करता है या फिर उसमें परेशानी आ जाती है तो इसके चलते ग्राहकों को अलग-अलग परेशानियों को झेलना पड़ता है. उनकी मेहनत की कमाई उसमें फंस जाती है. इसके साथ ही मंत्री निर्मला ने बताया कि देश के 227 अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों (Urban Co-Operative Banks) की हालत काफी ज्यादा खराब है. यहां तक कि 105 को-ऑपरेटिव बैंक इस प्रकार के हैं, जिनके पास जरूरी न्यूनतम नियामकीय पूंजी (Minimum Regulatory Capital) तक नहीं है. जबकि 47 को-ऑपरेटिव बैंक ऐसे हैं जिनकी नेटवर्थ निगेटिव (Negative Net Worth) है. इसके अलावा 328 अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक ऐसे भी हैं जिनकी कुल नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Gross NPA) 15 प्रतिशत से अधिक है.

दरअसल हाल ही में निर्मला सीतारमण ने संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) के शुरूआती वाले दिन यानी सोमवार को ही पब्लिकली एरिया के बैंकों (PSBs) को रीकैपिटलाइजेशन बॉन्ड (Recapitalisation bonds) के तहत 20 हजार करोड़ रुपये देने को लेकर संसद की इस पर मंजूरी की मांग की थी. इस बारे में सरकार की ओर से कहा गया है कि इस फैसले से सरकारी बैंकों को भी काफी राहत पहुंचेगी. इसके साथ ही वित्त मंत्री का कहना है कि कोरोना महामारी के चलते कर्जदारों की ओर से पैसा वापस नहीं आने के कारण अब सरकारी बैंकों पर भी काफी ज्यादा प्रेशर पड़ रहा है. मंत्री ने आगे कहा कि, इनका नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बढ़ रहा है. ऐसे में सरकार इन बैंकों को पूंजी देकर नकदी संकट से निकालने में मदद कर पाएगी. इसके अलावा लोकसभा में अनुदान की अनुपूरक डिमांड (Supplementary Demand for Grants) की बात करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि, इससे देश के राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) में बढ़ोतरी नहीं होगी.

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