Gold

नई दिल्ली। हर भारतीय के लिए गोल्ड निवेश (Gold investment) के रूप में सबसे पसंदीदा रहा है। यह आर्थिक मुसीबत में हमेशा यह काम आती है। यही कारण है कि जब से दुनिया में महामारी आई है तब से सोने के दामों में रोलर कोस्टर की सवारी पर हैं। वहीं निवेश विशेषज्ञ और फंड मैनेजर सोने के आभूषण से अधिक पेपर गोल्ड की को पसंद करते हैं। हालांकि, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bonds ) के उलट, बाजार की गति के मुताबिक सोने की कीमत बढ़ती रहती है, यह आपको कोई ब्याज नहीं देता है। आरबीआई के SGBs को सोने का सबसे पसंदीदा पेपर गोल्ड के रूप मानते हैं क्योंकि यह पीली धातु में मूल्य वृद्धि के साथ-साथ ब्याज भी अधिक देता है।

घर पर रखें सोने के गहनों से कमाएं रुपये

आप अपने सोने के गहनों (Gold jewellery ) को बैंक में स्टोर करना ज्यादा पसंद करते हैं तो आपको लॉकर शुल्क देना होता है। एक तरीका है जिससे आप अपने घर पर रखे सोने के आभूषण से ज्यादा कमा सकते हैं। आप सोने को RBI द्वारा निर्दिष्ट बैंक में जमा कर सकते हैं और उस पर ब्याज ले सकते हैं। यह सुविधा आरबीआई की स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (Gold Monetisation Scheme) के तहत ग्राहकों को दी जाती है। यह बैंक की फिस्क्ड डिपाॅजिट (bank fixed deposit) की भांति होता है, जहां आप अपना बेकार सोना बैंक के पास जमा करते हैं और मैच्योरिटी पर, सोने का मूल्य पर अर्जित ब्याज के साथ आपको वापस मिल जाता है।

Gold and Silverइन बैंकों में है ये सर्विस

एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), केनरा बैंक (Canara Bank), बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) सहित कई बैंक ट्विटर पर RBI की गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम का प्रचार करते आपको दिखाई तो जरूर दिए होंगे। HDFC Bank ने ट्विटर पर लिखा “आप बेकार पड़े सोने के आभूषणों पर ब्याज कमा सकते हैं। HDFC बैंक आपके निष्क्रिय सोने पर उच्च ब्याज अर्जित (idle lying gold jewellery) करता है। एचडीएफसी बैंक गोल्ड मोनेटाइजेशन योजना में निवेश करें, लॉन्ग टर्म डिपॉजिट पर 2.50% और मीडियम टर्म डिपॉजिट पर 2.25% कमाएं। आपको बता दें कि इस स्कीम के तहत, सोने के दाम मैच्योरिटी के वक्त वर्तमान भाव पर आधारित होगा। ब्याज की गणना सोने के जमा मूल्य (deposit value) पर होती है।

ये है गोल्ड मोनेटाइजेशन योजना

इस स्कीम को सोने में फिक्स्ड डिपाॅजिट के रूप में भी जमा किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति जो भारत का नागरिक हो वह इस स्कीम में निवेश कर सकता है। गोल्ड एफडी ज्वाइंट नाम से भी खोली जा सकती है। बैंक इस स्कीम के तहत सोने की छड़ों, सिक्कों, रत्नों और अन्य धातुओं को छोड़कर आभूषणों के रूप में कच्चा सोना लेते हैं। एक निवेशक कम से कम 10 ग्राम कच्चा सोना बैंक में जमा करा सकता है। निवेशक 1 से 15 साल के बीच कोई भी टर्म का चुनाव कर सकते हैं। विभिन्न कार्यकाल ऑप्शन हम आपको आगे बता रहे हैं।

शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट (STBD): कार्यकाल 1 से 3 वर्ष
मध्यम अवधि की सरकारी जमा (MTGD): कार्यकाल: 5-7 वर्ष
लंबी अवधि की सरकारी जमा (LTGD) अवधि 12-15 वर्ष

आपको बता दें कि मैच्योरिटी के वक्त जमाकर्ता को उसी रूप में सोना नहीं मिलता है, जो उसने जमा किया था। जमा किए गए सोने के गहनों को पीवीसी द्वारा पिघलाया और परखा जाता है।

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