बस्ती: जिस शातिर अपराधी की तलाश में जुटी पुलिस, वो यूपी वार्ता पर दे रहा था सफाई

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बस्ती: सीबीआई, एनआईए, रेलवे पुलिस सहित देश के कई राज्यों की पुलिस जिस शातिर अपराधी को ढूंढ रही है, उसने जनतंत्र टीवी से बात की और अपनी सफाई दी है। हामिद अशरफ IRCTC की साइट को हैक करने वाला एक ऐसा नाम है, जो रेलवे को कई करोड़ का चूना लगा चुका है। 2016 में हामिद को बस्ती से गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद हामिद जमानत पर बाहर आया और फिर से उसने पूरे देश में रेलवे की साइट को हैक करने का नेटवर्क शुरू कर दिया। इस समय हामिद कहां से अपना नेटवर्क चला रहा है? इस बात की जानकारी फिलहाल तो किसी को नहीं है। ये भी पढ़े :बस्ती: 4 साल से शिक्षकों को नहीं मिला वेतन, अब दी आत्मदाह की धमकी

दिल्ली RPF डीजी अरुण कुमार के प्रेस कांफ्रेंस में ई-टिकटिंग के धंधे से टेरर फंडिग में कप्तानगंज क्षेत्र के हामिद का नाम आने और खबरें प्रकाशित होने के बाद पिता भी भाग निकला है। पिता के भाग जाने से अब लोगों का शक गहरा गया है। ई-टिकटिंग के जरिये टेरर फंडिंग का मुख्य किरदार हामिद अशरफ कप्तानगंज थाना क्षेत्र के रमवापुर कला का निवासी है। रोजी रोटी चलाने के लिए हामिद के पिता जमीरुल हसन उर्फ लल्ला चूड़ी का काम करते थे, मगर पिछले 10 वर्ष में चूड़ी व्यवसायी यह परिवार शून्य से शिखर पर पहुंच गया।

हमारे संवाददाता ने जब टिकट हैकर हामिद अशरफ के घर जाकर उसके परिवार वालों से बात करनी चाही तो किसी ने भी कैमरे पर बात नहीं की और हामिद के पिता से बात कराने के नाम पर नम्बर लिया, लेकिन वहां से निकलने के तुरंत बाद हामिद अशरफ ने इंटरनेट से कॉल की और अपनी सफाई पेश की। हामिद अशरफ ने कहा कि वह अपनी सुरक्षा को लेकर कैमरे के सामने नहीं आ सकता, इसलिए वह मीडिया के सवालों का जवाब लिखित में भेज देगा। इसके बाद हमारे संवाददाता ने उससे लिखकर कुछ सवाल किए, जिसका जवाब हामिद अशरफ ने लिखित में और ऑडियो में दिया है। हामिद ने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा कि उसके पुराने साथी ही रहे शमशेर और सलमान उसे फंसा रहे हैं और उसको जान से मारना भी चाहते हैं। इसलिए वह मीडिया में चल रही खबरों को लेकर अपनी सफाई पेश कर रहा है। हामिद ने कहा है कि 5 दिन पहले कर्नाटक पुलिस ने रेलवे की साइट को हैक करने वाले शख्स गुलाम मुस्तफा को गिरफ्तार किया गया और उसके बाद से डीजी रेलवे ने मीडिया में बताया कि हामिद इस गैंग का सरगना है और टेरर फंडिंग में भी हामिद शामिल है, जबकि कर्नाटक में हुई FIR में उसका कहीं भी नाम नहीं है, इसके बाद उसका नाम कैसे आया यह समझ से परे है।

हामिद के पिता जमीरुल हसन ने वर्तमान में जहां एक तीन मंजिला मार्ट का निर्माण कराया है। वहीं, दो मंजिला रिहायशी बिल्डिंग व 20 कमरों वाला एक मार्केट निर्माणाधीन है। कस्बा व गांव के अलावा महानगरों में खुद व रिश्तेदारों के नाम पर तमाम जमीन भी है। इसका सही आकलन कोई नहीं लगा पा रहा है। हामिद का पालन पोषण सामान्य परिस्थितियों में हुआ। उसके पिता जमीरुल हसन चूड़ी की दुकानदारी से परिवार का पेट भरने में मुश्किलें देखकर पटरा बल्ली की दुकान खोल कर शटरिंग का काम करने लगे। इस काम में ही वह जुटे रहते थे, मगर पिछले तीन वर्ष से वे सब कुछ छोड़ जमीन खरीदने में जुट गए। परिवार की माली हालत ठीक न होने के कारण हामिद पुरानी बस्ती स्थित अपनी ननिहाल चला गया। यहीं से उसने पढ़ाई लिखाई की।

सूत्र बताते हैं कि पहले वह रेलवे स्टेशन के काउंटर की दलाली करता था और उसकी गिरफ्तारी भी एक बार यहीं हुई थी। हालांकि, इसके बाद वह कहां गया गांव के लोगों को मालूम नहीं है, मगर उसके गायब होने के बाद परिवार में धन की बारिश होने लगी। इसी धन से पिता जमीरुल हसन ने कस्बे में मार्ट व रिहायशी आवास तथा मार्केट बनवा दिया। वे अपना काम छोड़ अपने संपत्तियों की देखरेख करते हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि क्षेत्र में कहीं कोई जमीन बिकती है तो जमीरुल हसन सबसे पहले खरीदार होते हैं। पहली बार जमीरुल हसन की अकूत कमाई तब चर्चा में आई, जब इन्होंने प्रधानी के चुनाव में दावेदारी की। चुनाव जीतने के लिए उन्होंने पानी की तरह धन बहाया। ग्रामीणों की मानें तो हामिद के पिता ने जमीन के रूप में करोड़ों रुपये की संपत्ति एकत्रित कर रखी है। सूत्र बताते हैं कि गांवों से लेकर महानगरों तक इस परिवार की जमीन की लंबी फेहरिस्त है, जिसे खुद अथवा रिश्तेदारों के नाम से खरीदा गया है। टेरर फंडिंग में नाम आने के बाद क्षेत्र में उनके अमीर बनने की चर्चाओं का बाजार गर्म है। फिलहाल, हामिद अशरफ का नाम टेरर फंडिंग से जुड़ने के बाद जमीरुल हसन अपने रमवापुर कला स्थित आवास से फरार है। ये भी पढ़े :बस्ती: 3 सालों से प्रशासन की जगह भगवान के भरोसे है ये अस्पताल, लोग हुए बेहाल 

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