Neeraj Yadav Suicide: भारतीय खेल जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। तीन बार एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय पैरा एथलीट नीरज यादव का निधन हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें उनके फ्लैट में मृत पाया गया और शुरुआती जानकारी में जहर खाने की बात सामने आई है। नीरज की मौत की खबर से खेल जगत में शोक की लहर है। उन्होंने अपनी मेहनत और हौसले के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया था। फिलहाल उनकी मौत के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम से जुड़ी जानकारी के आधार पर मामले की पड़ताल की जा रही है।
तीन बार देश को दिलाया गोल्ड, अब मौत की खबर से सदमे में खेल जगत
नीरज यादव ने एशियन पैरा गेम्स में लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई थी। वह जेवलिन थ्रो यानी भाला फेंक स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करते थे। साल 2022 में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने F55 कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता था। उनकी उपलब्धियां भारतीय पैरा खेलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। ऐसे खिलाड़ी का अचानक दुनिया से चले जाना खेल प्रेमियों और साथी खिलाड़ियों के लिए बड़ा झटका है। नीरज की मौत की खबर सामने आने के बाद उनके खेल करियर और संघर्ष को लेकर भी चर्चा हो रही है।
दिल्ली में हुआ पोस्टमार्टम, मौत की असली वजह पर अब भी सवाल
मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल में नीरज यादव का पोस्टमार्टम किया गया। रिपोर्ट्स में जहर खाने की बात सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इसे लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। खबरों के मुताबिक, पैरालंपिक चैंपियन सुमित आंटिल और पैरा एथलीट विपिन कसाना भी अस्पताल में मौजूद थे। भारतीय पैरा एथलेटिक्स के मुख्य कोच एस. सत्यनारायण ने नीरज के निधन को बेहद दुखद बताया। उन्होंने प्रतिबंध के कारण संभावित मानसिक दबाव की आशंका जताई, लेकिन इसे मौत की प्रमाणित वजह नहीं बताया है।
डोपिंग मामले में लगा था चार साल का प्रतिबंध, 2027 तक नहीं खेल सकते थे
नीरज यादव के करियर को नवंबर 2023 में बड़ा झटका लगा था, जब डोपिंग नियमों के उल्लंघन का दोषी पाए जाने के बाद उन पर चार साल का प्रतिबंध लगाया गया था। यह प्रतिबंध 2027 के अंतिम महीनों तक लागू रहने वाला था। इसके चलते वह 2026 के एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा नहीं ले सके। कोच एस. सत्यनारायण ने आशंका जताई कि प्रतिबंध के कारण नीरज मानसिक तनाव से गुजर रहे हो सकते थे। हालांकि, इस बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि प्रतिबंध का उनकी मौत से कोई सीधा संबंध था। इसलिए मौत के कारणों को लेकर जांच के निष्कर्ष सामने आने तक किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
बचपन में पोलियो से प्रभावित हुए, फिर भी खेलों में बनाई पहचान
उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले नीरज यादव का जीवन संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल रहा। बताया जाता है कि सात साल की उम्र में पोलियो से प्रभावित होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। शुरुआत में उन्होंने 2005 से 2012 तक व्हीलचेयर टेनिस में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने पैरा एथलेटिक्स की ओर रुख किया और जेवलिन थ्रो में अपनी पहचान बनाई। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तीन स्वर्ण पदक जीतना उनकी कड़ी मेहनत का प्रमाण था। उनकी मौत ने एक बार फिर खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य, खेल प्रतिबंधों के दौरान मिलने वाले सहयोग और कठिन परिस्थितियों में भावनात्मक मदद की जरूरत पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल सभी की नजरें मामले की जांच और मौत से जुड़े आधिकारिक तथ्यों पर हैं।
