अजमेर की हाई-सिक्योरिटी सेंट्रल जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भांजे और सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के मुख्य आरोपियों में से एक सचिन थापन उर्फ सचिन बिश्नोई की सेहत बुधवार (21 अक्टूबर) को अचानक बेहद गंभीर हो गई। जेल के अंदर फोन यानी एसटीडी सुविधा बंद किए जाने के विरोध में सचिन पिछले 17 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर बैठा हुआ था। लंबे समय तक कुछ भी अन्न-जल ग्रहण न करने के कारण उसके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, विशेषकर किडनी पर बुरा असर पड़ा है। बुधवार दोपहर हालत ज्यादा बिगड़ने के बाद जेल प्रशासन ने आनन-फानन में उसे कड़ी सुरक्षा के बीच अजमेर के जवाहरलाल नेहरू (JLN) अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उसका इलाज चल रहा है।
अस्पताल बना पुलिस छावनी, हथियारबंद कमांडोज का कड़ा पहरा
अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद से ही मेडिकल वार्ड और उसके आसपास का इलाका किसी छावनी में तब्दील कर दिया गया है। सचिन बिश्नोई की सुरक्षा में पुलिस और कमांडोज की तीन स्तर की मजबूत घेराबंदी की गई है। हाल ही में फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग द्वारा लिए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं। इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए अस्पताल परिसर और उसके आस-पास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या बाहरी खतरे से पूरी तरह से निपटा जा सके।
फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश भागने के बाद हुआ था प्रत्यर्पण
आपराधिक इतिहास की बात करें तो सचिन बिश्नोई के खिलाफ देश के कई थानों में गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। बहुचर्चित पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या को अंजाम देने से ठीक पहले वह फर्जी पासपोर्ट के सहारे भारत से फरार हो गया था। वह पहले दुबई और फिर वहां से अज़रबैजान भाग निकला था। लंबी कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया के बाद, पिछले साल 1 अगस्त 2023 को उसे प्रत्यर्पण (Extradition) के जरिए कड़ी सुरक्षा के बीच अज़रबैजान से भारत वापस लाया गया था, और तभी से वह अजमेर सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत के तहत अपनी सजा काट रहा है।
इलाज के दौरान भी जिद पर अड़ा गैंगस्टर, डॉक्टरों की टीम रख रही नजर
अस्पताल लाए जाने के बाद भी सचिन बिश्नोई का रवैया अपनी मांगों को लेकर सख्त बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, वह अस्पताल के अंदर भी डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली दवाइयां और खान-पान की चीजें लेने से पूरी तरह इनकार कर रहा है, जिससे मेडिकल टीम के सामने उसकी सेहत सुधारना एक बड़ी चुनौती बन गया है। जेल और पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी लगातार उसकी स्वास्थ्य स्थिति और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। भूख हड़ताल और जिद के चलते उसकी बिगड़ती तबीयत ने जेल प्रशासन की धड़कनों को तेज कर दिया है।
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