ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा (Neha Bora) को दिल्ली हाई कोर्ट से जुड़ी एक अहम कानूनी कार्रवाई में राहत की उम्मीद है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्हें दिल्ली पुलिस की ओर से 10 हजार रुपये का बॉन्ड भरने का नोटिस दिया गया था। नेहा ने इस नोटिस को अदालत में चुनौती दी है। बुधवार, 21 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने के लिए सहमत हुआ। याचिका में नोटिस को रद्द करने और पुलिस को उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाने का निर्देश देने की मांग की गई है। अब इस मामले में अदालत की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
दिल्ली पुलिस के नोटिस में क्या कहा गया था?
दिल्ली पुलिस ने 17 अक्टूबर को नेहा बोरा (Neha Bora) को नोटिस जारी किया था। इसमें उन्हें 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत जारी किया गया था। इसके अनुसार, नेहा को यह बताना था कि शांति बनाए रखने के लिए उनसे एक जमानतदार के साथ 10 हजार रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड क्यों न भरवाया जाए। नेहा ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की। इससे पहले उन्होंने तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था, लेकिन दशहरा अवकाश के कारण उस समय रात में सुनवाई नहीं हो सकी थी।
BNSS की धारा 126 क्या है और अब आगे क्या होगा?
BNSS की धारा 126 के तहत, यदि मजिस्ट्रेट को ऐसी विश्वसनीय जानकारी मिलती है कि किसी व्यक्ति से शांति भंग होने की आशंका है, तो उसे तय अवधि तक शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने का निर्देश दिया जा सकता है। यह कार्रवाई संभावित गड़बड़ी को रोकने के उद्देश्य से की जाती है। नेहा बोरा (Neha Bora) हाल के दिनों में मतदाता सूची के SIR को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं। उन्होंने अपनी याचिका में पुलिस के नोटिस को गलत बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की है। अब हाई कोर्ट सुनवाई के दौरान याचिका में उठाए गए सवालों पर विचार करेगा। अदालत इस मामले में क्या आदेश देती है और नेहा को कोई राहत मिलती है या नहीं, यह सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
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