उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित शिवा हत्याकांड मामले में पुलिस ने आखिरकार मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे को 11 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद नागपुर से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसके साथ उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश को भी दबोच लिया है। लखनऊ से लगभग 840 किलोमीटर दूर हुई इस गिरफ्तारी को लेकर एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सनसनीखेज खुलासे किए हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, श्रद्धा किसी पेशेवर अपराधी की तरह पुलिस को चकमा दे रही थी और गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपनी पहचान पूरी तरह छिपाने की कोशिश की थी।
पहचान छिपाने के लिए बुर्के का इस्तेमाल और नेपाल भागने की चाल
एडीजी अमिताभ यश ने बताया कि फरारी के दौरान श्रद्धा दुबे बेहद शातिर तरीके से अपनी चालें चल रही थी। पुलिस को भ्रमित करने के लिए वह सबसे पहले नेपाल भाग गई थी ताकि जांच एजेंसियों का ध्यान भटकाया जा सके। इसके बाद वह चुपचाप वापस उत्तर प्रदेश लौटी और लखनऊ आकर एक मीडिया चैनल को इंटरव्यू (बाइट) भी दिया। मीडिया के सामने आने के तुरंत बाद वह राज्य से बाहर निकल गई। इस पूरे सफर के दौरान उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए लगातार बुर्के का इस्तेमाल किया और ऐसे गुमनाम होटलों में रुकती थी जहां आईडी या पहचान संबंधी औपचारिकताएं न्यूनतम होती थीं।
हर 10-12 घंटे पहले ठिकाना बदलना और लगातार टैक्सियां बदलना
जांच में यह भी सामने आया है कि श्रद्धा पुलिस की गिरफ्त से दूर रहने के लिए एक जगह पर ज्यादा देर नहीं रुकती थी। वह डिजिटल कम्यूनिकेशन का इस्तेमाल करने से भी बचती थी ताकि सर्विलांस के जरिए उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके। वह हर बार पुलिस की टीम से 10 से 12 घंटे आगे चल रही थी। यानी पुलिस जब तक किसी ठिकाने पर पहुंचती, उससे ठीक आधा दिन पहले ही वह वहां से फरार हो चुकी होती थी। नागपुर तक का सफर तय करने के लिए उसने बार-बार टैक्सियां बदलीं, जिससे पुलिस के लिए उसके सटीक रास्ते का अंदाज़ा लगाना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया था।
ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाने की तैयारी, सहयोगियों की तलाश जारी
पुलिस के अनुसार, अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन करने के बाद श्रद्धा लगातार अपने वाहन और ठिकाने बदलती रही ताकि कोई उसका पीछा न कर सके। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस लंबी फरारी के दौरान उसे किसने और किस स्तर पर शरण या मदद दी थी। एडीजी ने बताया कि आरोपियों को लखनऊ लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस टीमें लगातार बिना रुके यात्रा कर रही थीं, इसलिए थोड़ा आराम मिलने के बाद आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर जल्द ही सड़क या अन्य माध्यम से लखनऊ लाया जाएगा, जहां पूछताछ के बाद इस हत्याकांड से जुड़े कई और अहम राज खुलकर सामने आ सकते हैं।
