UP Panchayat Election 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। हाईकोर्ट की ओर से तीन महीने के भीतर चुनाव कराने के निर्देश के बाद अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर है। इस बीच प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने चुनाव की तैयारियों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार पंचायत चुनाव कराने के लिए तैयार है, लेकिन पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के बिना आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या आयोग की रिपोर्ट तय समय पर आ जाएगी और प्रदेश में पंचायत चुनाव का रास्ता साफ हो पाएगा? राजभर ने इस मुद्दे के साथ राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी और विपक्ष के आंदोलनों पर भी निशाना साधा।
पंचायत चुनाव की तारीख पर क्या बोले ओपी राजभर?
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार UP Panchayat Election कराने से पीछे नहीं हट रही है और चुनाव के लिए तैयार है। हालांकि, पंचायत चुनाव में पिछड़े वर्ग के आरक्षण सहित जरूरी प्रावधानों को पूरा करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट अहम है। उनके मुताबिक, हाईकोर्ट ने आयोग को एक महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अब आयोग को तय समय में अपनी रिपोर्ट तैयार कर अदालत के सामने रखनी होगी। रिपोर्ट आने के बाद ही आरक्षण और चुनाव से जुड़ी आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल चुनाव की निश्चित तारीख घोषित होने की जानकारी नहीं है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की नजर आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। चुनाव कार्यक्रम का ऐलान संबंधित प्रक्रिया पूरी होने और आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगा।
राहुल गांधी और सपा के रिश्तों पर राजभर का तीखा हमला
UP Panchayat Election के सवालों के बीच राजभर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के राजनीतिक रिश्तों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान का समर्थन करते हुए राहुल गांधी को अमेठी से बिना सपा के समर्थन के चुनाव लड़ने की चुनौती दी। राजभर ने दावा किया कि राहुल गांधी की चुनावी सफलता में समाजवादी पार्टी का समर्थन अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने अमेठी और रायबरेली का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता के अपने जनाधार पर सवाल उठाए। हालांकि, ये राजभर के राजनीतिक आरोप हैं। इस बयान से कांग्रेस और सपा के बीच चुनावी तालमेल तथा विपक्षी राजनीति को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है। आगामी चुनावों में विभिन्न दलों के बीच गठबंधन और सीटों के बंटवारे जैसे मुद्दे भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने रहेंगे।
विपक्ष के प्रदर्शन और चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल
ओमप्रकाश राजभर ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद को संवैधानिक बताते हुए कहा कि किसी आंदोलन के दबाव में उन्हें हटाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि इसके लिए संविधान में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। राजभर ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान के चुनावों का उल्लेख करते हुए विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर भी सवाल उठाए। इसके अलावा, उन्होंने दिल्ली में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर प्रदर्शनकारियों के आने-जाने, रहने और खाने के खर्च पर सवाल उठाते हुए फंडिंग की जांच की मांग की। हालांकि, खर्च को लेकर उनके सवालों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं रखा गया। फिलहाल UP Panchayat Election को लेकर सबसे अहम घटनाक्रम पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट है। रिपोर्ट आने और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही चुनाव की तारीख को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
