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BJP के गठबंधन में राजभर ने ही लगा दी सेंध? चिराग पासवान की पार्टी के कई नेता सुभासपा में शामिल

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले ओपी राजभर की सुभासपा में लोजपा (रामविलास) के कई नेता शामिल हुए। जानिए चिराग पासवान की पार्टी और एनडीए के राजनीतिक समीकरणों पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

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UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के भीतर राजनीतिक हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कई नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करा लिया। इस घटनाक्रम ने यूपी में एनडीए के सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि, इसे गठबंधन में दरार का संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी।

चिराग पासवान की पार्टी के नेताओं ने क्यों बदला पाला?

16 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान सुभासपा में लोजपा (रामविलास) के कई पदाधिकारियों ने सदस्यता ली। इनमें लोकेश कुमार श्रीवास्तव, पीयूष सोमानी, वेद प्रकाश, अंशुमान कुदेशिया, कल्याणी साहू, महेश सिंह भदौरिया, मोनू पंडित, स्वयं प्रकाश और अमन रावत के नाम शामिल हैं। ये नेता अपनी पार्टी में अलग-अलग संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा रहे थे। इसके अलावा समाजवादी पार्टी से जुड़े मोहम्मद मुर्शिद खान के नेतृत्व में 40 लोगों ने भी सुभासपा का दामन थामा। राजभर की पार्टी में इन नेताओं के शामिल होने से प्रदेश में संगठन विस्तार की कोशिशों को नई गति मिल सकती है। हालांकि, नेताओं के पार्टी छोड़ने के पीछे की वजहों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

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403 सीटों पर तैयारी की बात, क्या बढ़ेगी सहयोगियों की चुनौती?

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब चिराग पासवान की पार्टी उत्तर प्रदेश में भाजपा के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर अपनी दावेदारी जता रही है। पार्टी के यूपी प्रभारी अरुण भारती पहले ही कह चुके हैं कि संगठन गठबंधन के मंच पर अपनी बात रखेगा। साथ ही, पार्टी ने सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनावी तैयारी का संकेत दिया है। हाल ही में लखनऊ में रामविलास पासवान की पुण्यतिथि से जुड़े कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के कई नेता शामिल हुए थे। ऐसे में लोजपा (रामविलास) के नेताओं का सुभासपा में जाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा और उसके सहयोगी दल सीटों के बंटवारे तथा संगठन विस्तार के मुद्दे पर किस तरह तालमेल बनाते हैं। फिलहाल, राजभर के इस कदम से एनडीए के भीतर संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा जरूर तेज हो गई है।

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