कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े नेताओं और स्वतंत्र पत्रकारों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली पुलिस ने पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका, रत्ना सिंह और स्वतंत्र पत्रकार रोजी व गजेंद्र सिंह के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC-ST) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, यह एफआईआर कनॉट प्लेस सब-डिवीजन के एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एसीपी के लिए अपमानजनक और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, ये फिलहाल आरोप हैं और मामले में दोष तय होना बाकी है। इस कार्रवाई के बीच सौरव दास और आशुतोष रांका को एक अन्य मामले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर भी सामने आई है। ऐसे में CJP से जुड़े घटनाक्रम पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजर बनी हुई है।
एसीपी की शिकायत पर दर्ज हुई FIR, छह लोग नामजद
दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज मामले में कुल छह लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें CJP के अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के अलावा स्वतंत्र पत्रकार रोजी और गजेंद्र सिंह शामिल हैं। शिकायत के अनुसार, एसीपी विवेक भगत के खिलाफ कथित तौर पर जातिसूचक और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। इसी शिकायत के आधार पर SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। अब जांच के दौरान पुलिस आरोपों से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल करेगी। दूसरी ओर, आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर पर प्रतिबंधों के बावजूद प्रवेश करने और सुरक्षा घेरा तोड़ने से जुड़े मामले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी दी गई है। दोनों को तिहाड़ जेल ले जाया गया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि SC-ST एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर और न्यायिक हिरासत से जुड़ा मामला अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं से संबंधित हैं।
गिरफ्तारी के विरोध में 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च का ऐलान
CJP ने सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च निकालने की घोषणा की है। पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर समर्थकों से शाम पांच बजे सेंट्रल पार्क में जुटने की अपील की। उन्होंने दिल्ली नहीं पहुंच पाने वाले लोगों से अपने-अपने शहरों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का भी आग्रह किया। इससे पहले नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान दीपके ने केंद्र सरकार पर अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया था। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा था कि CJP एक स्वतंत्र समूह है और अपनी अलग पहचान बनाए रखेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अलग-अलग संगठन होने के बावजूद उनके आंदोलन के उद्देश्य कुछ मामलों में समान हो सकते हैं।
विदेशी फंडिंग के दावों पर भी उठाए सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अभिजीत दीपके ने विरोध प्रदर्शनों को विदेशी आर्थिक मदद मिलने के दावों पर भी प्रतिक्रिया दी। पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे के कथित दावे के संदर्भ में दीपके ने कहा कि यदि विदेशी फंडिंग से जुड़े ठोस सबूत हैं, तो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने इस मामले में सबूत सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई। फिलहाल CJP नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर में जांच की दिशा और सामने आने वाले साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। वहीं, प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर भी आगे की स्थिति पर नजर रहेगी। इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
