उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने संगठन को मजबूत करने के लिए बैठकों का दौर तेज कर दिया है। पार्टी के बड़े नेताओं के यूपी दौरे के बीच अंदरूनी फीडबैक में कई चुनौतियों का जिक्र सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी को चिंता है कि इस बार चुनाव का माहौल हिंदुत्व से ज्यादा जातीय समीकरणों की ओर जा सकता है। अगर चुनाव पूरी तरह जाति के मुद्दे पर केंद्रित हुआ तो बीजेपी के लिए समीकरण मुश्किल हो सकते हैं। इसके अलावा बेरोजगारी, युवाओं के मुद्दे और विपक्ष के सोशल मीडिया नैरेटिव को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा हुई है।
कार्यकर्ताओं और विधायकों की नाराजगी भी चुनौती
बीजेपी के लिए बूथ स्तर का संगठन हमेशा चुनावी ताकत रहा है, लेकिन इस बार कार्यकर्ताओं की नाराजगी को लेकर भी फीडबैक सामने आया है। सूत्रों के अनुसार कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी समस्याओं और सुझावों को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा। वहीं कई विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय विधायकों के खिलाफ नाराजगी की बात भी सामने आई है। पार्टी के सामने एंटी-इनकंबेंसी से निपटने की चुनौती है। बताया जा रहा है कि संगठन स्तर पर विधायकों के प्रदर्शन और जनता के बीच उनकी स्थिति का आकलन भी किया जा रहा है।
सोशल मीडिया और युवाओं पर नजर
चुनाव में सोशल मीडिया को बीजेपी अहम मोर्चा मान रही है। सूत्रों के मुताबिक विपक्ष के बढ़ते डिजिटल नैरेटिव का जवाब देने के लिए पार्टी की मीडिया टीम को ज्यादा सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर जोर है। रोजगार, बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे मुद्दों को लेकर भी सरकार की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर मंथन चल रहा है। साथ ही संगठन की नई टीम को चुनावी मिशन में पूरी तरह सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है।
BL संतोष के दौरे से क्या निकलेगा?
बीएल संतोष और अन्य वरिष्ठ नेताओं की बैठकों के बाद पार्टी अब मिले फीडबैक के आधार पर आगे की रणनीति तैयार कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी फिलहाल 2027 के मुकाबले को एकतरफा नहीं मान रही और संगठन के स्तर पर इसे कड़ी टक्कर वाला चुनाव माना जा रहा है। बसपा के कमजोर प्रदर्शन और दलित वोटों के संभावित बंटवारे को लेकर भी पार्टी के भीतर रणनीति पर चर्चा है। बैठकों में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और सभी नेताओं को एकजुट होकर चुनाव लड़ने पर जोर दिया गया है। अब अगले छह महीने बीजेपी के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
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