Kanpur News: उत्तर प्रदेश अब तेजी से देश के बड़े रक्षा विनिर्माण केंद्रों में अपनी जगह बना रहा है। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत कानपुर में अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की गतिविधियां इस दिशा में अहम भूमिका निभा रही हैं। कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ बड़े निवेश और रोजगार के अवसरों पर भी काम कर रही है। कानपुर स्थित एम्युनिशन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में फिलहाल हर साल करीब 15 करोड़ राउंड गोलियां तैयार की जा रही हैं, जिसे बढ़ाकर 30 करोड़ राउंड तक ले जाने की तैयारी है।
250 एकड़ में होगा विस्तार, 2 हजार करोड़ का निवेश
कंपनी की ओर से कानपुर के हाथीपुर इलाके में करीब 250 एकड़ में यूनिट के विस्तार की योजना बनाई गई है। इस विस्तार पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात सामने आई है। कंपनी पहले ही कानपुर में करीब 4,000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है और आने वाले वर्षों में करीब 4,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त निवेश करने की योजना है। मौजूदा समय में इस यूनिट में करीब 2,000 कुशल और अकुशल कर्मचारी काम कर रहे हैं। विस्तार के बाद प्रत्यक्ष रोजगार के साथ लॉजिस्टिक्स और दूसरी संबंधित गतिविधियों में भी नए अवसर बनने की उम्मीद है। इससे कानपुर की पहचान उत्तर प्रदेश के प्रमुख डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में और मजबूत हो सकती है।
15 करोड़ से 30 करोड़ राउंड तक पहुंचेगा उत्पादन
कानपुर की इस फैक्ट्री में अलग-अलग तरह के रक्षा गोला-बारूद का निर्माण किया जा रहा है। इनमें छोटे हथियारों में इस्तेमाल होने वाली गोलियों के अलावा टैंक और आर्टिलरी सिस्टम में इस्तेमाल होने वाला बड़ा कैलिबर एम्युनिशन भी शामिल है। कंपनी साल के अंत तक अपनी वार्षिक उत्पादन क्षमता को करीब 30 करोड़ राउंड तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके अलावा मीडियम-कैलिबर एम्युनिशन के उत्पादन की भी तैयारी है, जिसे 2027 तक शुरू किए जाने की उम्मीद है। कंपनी की योजना ग्रेनेड उत्पादन बढ़ाने की भी है। 2027 तक सालाना करीब 40 लाख ग्रेनेड बनाने की क्षमता हासिल करने और इसके बाद 2029 तक इतनी ही अतिरिक्त क्षमता विकसित करने का लक्ष्य बताया गया है। इससे घरेलू जरूरतों को पूरा करने और विदेशों से रक्षा सामग्री मंगाने की निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद आत्मनिर्भरता पर जोर
अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को जरूरी बताते हुए ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक इस तरह की परिस्थितियां बताती हैं कि देश को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत करनी होगी। कानपुर यूनिट में कई आधुनिक हथियार प्रणालियों को भी प्रदर्शित किया गया। इनमें अभय राइफल, प्रहार लाइट मशीन गन, पिस्टल और अन्य आधुनिक राइफल व मशीन गन शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि इन उत्पादों के जरिए भारत में रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही भारतीय जरूरतों के साथ मित्र देशों की मांग को भी पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
AI से जांच, नाटो मानकों के मुताबिक तैयार हो रहा एम्युनिशन
कानपुर की फैक्ट्री में उत्पादन के साथ गुणवत्ता जांच में भी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। एआई आधारित इंस्पेक्शन तकनीक के जरिए एम्युनिशन केस की जांच निर्धारित मानकों के अनुसार की जाती है। इससे जांच प्रक्रिया को ज्यादा तेज और सटीक बनाने में मदद मिलती है। कंपनी के अनुसार यहां तैयार किए जा रहे गोला-बारूद और आर्टिलरी सिस्टम नाटो मानकों के अनुरूप हैं। इससे उत्पादों की गुणवत्ता और अलग-अलग हथियार प्रणालियों के साथ उनकी अनुकूलता बनाए रखने में मदद मिलती है। कुल मिलाकर बड़े निवेश, बढ़ती उत्पादन क्षमता, आधुनिक तकनीक और रोजगार के साथ कानपुर उत्तर प्रदेश के डिफेंस सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के तौर पर उभर रहा है।
Read More-Gen-Z को लेकर नेताजी के परपोते ने कर दिया बड़ा ऐलान, अब बनाएंगे ‘आजाद हिंद पार्टी’, जानें क्यों?
