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पहाड़ों का सबसे बड़ा योद्धा हार गया जिंदगी की जंग, निर्मल पुर्जा नहीं रहे, आखिर पर्वतारोही के साथ क्या हुआ?

नेपाल के प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा का पाकिस्तान के ब्रॉड पीक पर एवलांच के बाद निधन हो गया। जानिए 189 दिनों में 14 सबसे ऊंची चोटियां फतह करने वाले निम्स दाई की प्रेरणादायक यात्रा और उनकी बड़ी उपलब्धियां।

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Nirmal Purja Death: दुनिया के सबसे चर्चित पर्वतारोहियों में गिने जाने वाले नेपाल मूल के निर्मल पुर्जा का निधन हो गया है। वह पाकिस्तान की काराकोरम पर्वतमाला स्थित ब्रॉड पीक पर पर्वतारोहण अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। इसी दौरान अचानक आए भीषण बर्फीले तूफान (एवलांच) की चपेट में पूरी टीम आ गई। हादसे के बाद सभी सदस्यों से संपर्क टूट गया था। खराब मौसम के बीच कई घंटों तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद उनकी मौत की पुष्टि की गई। इस दुखद खबर से पर्वतारोहण जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। बताया गया कि बचाव दल लगातार लापता पर्वतारोहियों की तलाश में जुटा रहा, लेकिन मौसम ने राहत कार्य को बेहद कठिन बना दिया। अधिकारियों के अनुसार, अभियान में शामिल कई पर्वतारोहियों की तलाश अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

एक रिकॉर्ड जिसने निर्मल पुर्जा को पूरी दुनिया में बना दिया था मशहूर

43 वर्षीय निर्मल पुर्जा ने साल 2019 में ऐसा कारनामा किया था, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उन्होंने दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों पर केवल 189 दिनों में सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की थी। यह उपलब्धि अपने आप में विश्व रिकॉर्ड थी और उन्होंने इससे पहले बने रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया था। उनकी इस ऐतिहासिक यात्रा पर आधारित नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री ’14 पीक्स: नथिंग इज़ इम्पॉसिबल’ भी काफी लोकप्रिय हुई। इस डॉक्यूमेंट्री ने दुनिया को दिखाया कि मजबूत इच्छाशक्ति और कठिन मेहनत के दम पर असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। इसी उपलब्धि के बाद निर्मल पुर्जा को आधुनिक दौर के सबसे प्रेरणादायक पर्वतारोहियों में गिना जाने लगा।

ब्रिटिश सेना से लेकर दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों तक का सफर

निर्मल पुर्जा का जीवन संघर्ष और साहस की मिसाल माना जाता है। पेशेवर पर्वतारोही बनने से पहले उन्होंने करीब 16 वर्षों तक ब्रिटिश सेना में सेवा दी थी। शुरुआत में उन्होंने ब्रिगेड ऑफ गोरखाज़ के साथ काम किया और बाद में रॉयल नेवी की विशेष इकाई स्पेशल बोट सर्विस का हिस्सा बने। वर्ष 2018 में उन्हें सैन्य सेवाओं के लिए MBE (Member of the Order of the British Empire) सम्मान भी दिया गया था। पर्वतारोहण की ओर उनका रुझान 2012 में एवरेस्ट बेस कैंप की यात्रा के बाद बढ़ा। इसके बाद उन्होंने लगातार कठिन चोटियों पर चढ़ाई कर अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने ‘निम्सदाई फाउंडेशन’ के माध्यम से नेपाल के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों की मदद के लिए भी कई सामाजिक पहल शुरू की थीं।

ब्रॉड पीक क्यों मानी जाती है दुनिया की सबसे कठिन चोटियों में से एक?

ब्रॉड पीक की ऊंचाई लगभग 8,051 मीटर है और इसे दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी माना जाता है। यह पाकिस्तान और चीन की सीमा के पास काराकोरम पर्वतमाला में स्थित है और K2 के बेहद करीब है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां मौसम कुछ ही मिनटों में बदल सकता है, जिससे एवलांच और तेज बर्फीले तूफान का खतरा हमेशा बना रहता है। यही कारण है कि इसे दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतारोहण चोटियों में गिना जाता है। निर्मल पुर्जा का निधन पर्वतारोहण समुदाय के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने साहस, अनुशासन और अद्भुत उपलब्धियों से लाखों लोगों को प्रेरित किया। पर्वतारोहण की दुनिया में उनका नाम हमेशा सम्मान और गर्व के साथ याद किया जाएगा।

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