राज्यसभा में चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों पर बेहद तीखा और बेबाक रुख अपनाया। उन्होंने इस गंभीर समस्या की तुलना सीधे तौर पर कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी से कर दी। संसद में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने साफ कहा कि युवाओं के भविष्य को दीमक की तरह चाटने वाले इस नासूर का इलाज मामूली गोलियों या ऊपरी दावों से नहीं किया जा सकता। इसके लिए एक मजबूत और स्थाई व्यवस्था (Institutional Solution) की सख्त जरूरत है, ताकि देश के किसी भी युवा का पसीना और उसके माता-पिता की मेहनत इस तरह पानी में न मिले।
‘क्रोसिन से नहीं मिटेगा पेपर लीक का नासूर’
संसद सत्र के दौरान एंटी पेपर लीक बिल पर अपनी बात रखते हुए राघव चड्ढा ने सरकार और विपक्ष दोनों का ध्यान इस ओर खींचा कि इस समस्या की जड़ें बहुत गहरी हैं। उन्होंने मेडिकल जगत का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कैंसर जैसी घातक बीमारी का इलाज केवल ‘क्रोसिन’ जैसी सामान्य पैरासिटामोल देकर नहीं किया जा सकता, ठीक उसी तरह पेपर लीक जैसी बड़ी व्यवस्थागत समस्या का समाधान सिर्फ मीडिया की सुर्खियों या बयानों से नहीं हो सकता। इसके लिए कानून में कड़े प्रावधान और प्रशासनिक स्तर पर कड़े फैसले लेने ही होंगे, तभी जाकर नकल माफियाओं के हौसले पूरी तरह पस्त हो सकेंगे।
‘एक छात्र की तैयारी में पूरा परिवार झोंकता है अपनी जिंदगी’
नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के दर्द को बयां करते हुए सांसद ने कहा कि जब कोई छात्र परीक्षा में बैठता है, तो केवल वह अकेला संघर्ष नहीं कर रहा होता, बल्कि उसके पीछे पूरे परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती हैं। मां घर खर्च चलाने के लिए अपना बजट सीमित करती है, पिता अपनी जीवन भर की जमापूंजी कोचिंग और पढ़ाई के खर्चों में लगा देता है, और कई बार तो परिवारों को भारी-भरकम कर्ज तक लेना पड़ता है। ऐसे में जब पेपर लीक होता है, तो वह सिर्फ एक परीक्षा का रद्द होना नहीं होता, बल्कि एक पूरे परिवार के सपनों का कत्ल होता है, इसलिए छात्रों का गुस्सा पूरी तरह जायज है।
सरकार के त्वरित एक्शन और जांच का किया जिक्र
चर्चा के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि छात्रों की पुकार सुनने के बाद सरकार और प्रधानमंत्री स्तर पर किस प्रकार तत्परता से काम किया गया। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि कैसे पेपर लीक के तुरंत बाद री-एग्जाम की व्यवस्था की गई ताकि बच्चों का कीमती शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो। इसके अलावा, मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन जांच सीबीआई को सौंपी गई और एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। इस एसआईटी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य सरगना (Kingpin) समेत कुल 13 लोगों को दबोचा, जिससे यह साफ हो गया कि सरकार दोषियों को बख्शने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
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