सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग को लेकर एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि प्रदर्शनों के दौरान मेटल पैलेट (धातु के छर्रे) का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे लोगों को गंभीर और स्थाई चोटें पहुंच रही हैं। इस पर सुनवाई करते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि मौजूदा हालात और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए पैलेट गन के इस्तेमाल पर एकदम से पूर्ण प्रतिबंध लगाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। हालांकि, अदालत ने इसके उपयोग को लेकर बनाए गए नियमों और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल (SOP) पर विचार करने की बात कही है।
मेटल पैलेट के इस्तेमाल पर वकीलों के बीच तीखी बहस
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित किया कि प्रदर्शनकारियों पर रबर बुलेट की जगह खतरनाक मेटल पैलेट का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार कभी भी युवा छात्रों पर इस तरह के घातक हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देना चाहेगी। इस पर पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में केवल छात्रों की बात नहीं है, बल्कि कई बार प्रदर्शनों की आड़ में उपद्रवी तत्व भी भीड़ में घुस जाते हैं, इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों को सभी जमीनी और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही कोई भी कड़ा कदम उठाना पड़ता है।
ब्रिटिश काल के नियमों का हवाला और कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने ऐतिहासिक संदर्भों का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि ब्रिटिश शासनकाल के दौरान हालात बिगड़ने पर सीधे सीने पर गोली चलाने तक के कड़े नियम हुआ करते थे, लेकिन समय के साथ अब लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्थितियां काफी बदल चुकी हैं। याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि दिल्ली पुलिस के नियमों में पैलेट गन के इस्तेमाल का स्पष्ट प्रावधान नजर नहीं आता है, इसलिए पुलिस को दिए गए आदेशों के रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाने चाहिए और उन्हें अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
केंद्र सरकार को नोटिस जारी, अब एसओपी पर टिकी निगाहें
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी याचिका पर केंद्र सरकार को औपचारिक रूप से नोटिस जारी कर दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा है कि भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर वर्तमान में क्या मानक प्रक्रिया यानी एसओपी (SOP) अपनाई जा रही है। अदालत अब इस प्रोटोकॉल की समीक्षा करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कानून-व्यवस्था की आड़ में आम नागरिकों और युवाओं के मानवाधिकारों का हनन न हो और सुरक्षा बलों को भी जरूरी कार्रवाई करने के लिए उचित दिशा-निर्देश मिल सकें।
