नीट पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या के विरोध में देशभर में हुए प्रदर्शनों के बीच कोलकाता में पत्रकारों पर हुए हमले का मामला अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शुरुआती जांच के आधार पर मीडिया कर्मियों पर हमला करने वाले लोग आंदोलन में शामिल छात्रों से जुड़े नहीं दिखाई देते। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थक मौजूद थे और बाद में कुछ वामपंथी संगठनों के लोग भी इसमें शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उनके बयान के बाद इस घटना को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।
पत्रकारों पर हमले को लेकर सरकार सख्त
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ हुई हिंसा बेहद गंभीर है। उनके अनुसार मीडिया कर्मियों को चोट पहुंचाने और जानलेवा हमला करने के आरोप में अब तक सात मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें कुछ एफआईआर पत्रकारों की शिकायत पर दर्ज हुई हैं, जबकि कुछ मामले पुलिस ने अपने स्तर पर दर्ज किए हैं। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद वह स्वयं अस्पताल पहुंचे और घायल पत्रकारों का हाल जाना। साथ ही उन्होंने कहा कि सभी जरूरी कानूनी प्रक्रिया, मेडिकल जांच और बयान दर्ज करने का काम कराया गया है। सरकार का कहना है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
Kolkata: On CJP-Left students’ protest in Kolkata, West Bengal Chief Minister Suvendu Adhikari says, “It was not a Leftist protest. It was the self-declared Cockroach Janta Party. Later, the Leftists joined.”
Regarding an attack on the media personnel during the protest, he… pic.twitter.com/oSMC3JYgGw
— ANI (@ANI) July 26, 2026
14 गिरफ्तार, जांच में कई पहलुओं की पड़ताल
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि पुलिस अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। उनके अनुसार शुरुआती जांच में गिरफ्तार लोगों का छात्र आंदोलन से सीधा संबंध सामने नहीं आया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ संदिग्ध तत्व माहौल बिगाड़ने की नीयत से प्रदर्शन में शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में आंदोलन से जुड़े लोगों ने पत्रकारों पर हुए हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में किसी बाहरी या विदेशी साजिश की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता, हालांकि इसकी पुष्टि केवल जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और मामले से जुड़े डिजिटल व अन्य सबूत जुटाए जा रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज, जांच रिपोर्ट का इंतजार
कोलकाता की इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। एक ओर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हमले को लेकर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और विभिन्न संगठनों की ओर से भी इस मामले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा और मीडिया पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने लोगों से अफवाहों से बचने और जांच पूरी होने तक धैर्य रखने की अपील की। अब सभी की नजर पुलिस और जांच एजेंसियों की अगली रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि पत्रकारों पर हमला किन लोगों ने किया और इसके पीछे असली वजह क्या थी।
