छात्र आंदोलन के बाद जंतर-मंतर से धरना समाप्त करने का ऐलान कर दिया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में अहम बैठक हुई। इस बैठक में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए, जबकि CJP की तरफ से सौरव दास और आशुतोष रांका ने बातचीत की। कई दौर की चर्चा के बाद दोनों पक्षों के बीच तीन प्रमुख मांगों पर सहमति बनने की जानकारी सामने आई। इसके बाद CJP ने जंतर-मंतर पर चल रहे धरने को समाप्त करने की घोषणा कर दी। आंदोलन खत्म होने के साथ ही प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्रों और समर्थकों ने राहत जताई और पूरे घटनाक्रम को आंदोलन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बदला माहौल
शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि उनका फैसला छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राष्ट्रविरोधी तत्व को छात्र आंदोलन का फायदा उठाने का अवसर नहीं मिलना चाहिए। पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की सबसे बड़ी मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा थी। बताया जा रहा है कि तीसरे दौर की वार्ता से पहले ही इस्तीफे की घोषणा होने के बाद बातचीत का माहौल सकारात्मक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने इसे अपनी प्रमुख मांग पूरी होने के रूप में देखा। वहीं सूत्रों के अनुसार धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए स्वेच्छा से पद छोड़ा, जिससे यह संदेश भी गया कि सरकार इस पूरे मामले को संवेदनशीलता के साथ संभालना चाहती है।
पेपर लीक पर सरकार की सख्ती भी बनी समझौते का हिस्सा
बैठक के दौरान केवल आंदोलन समाप्त करने पर ही नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर भी चर्चा हुई। इसी बीच केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान करने वाले संशोधन विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के अनुसार संगठित तरीके से पेपर लीक करने वालों को 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है। सरकार का मानना है कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी और भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। आंदोलनकारी भी लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
अब आगे क्या होगा, इस पर सबकी नजर
धरना समाप्त होने के बाद अब ध्यान इस बात पर रहेगा कि सरकार बैठक में बनी सहमति को किस तरह लागू करती है। छात्र संगठनों ने संकेत दिया है कि यदि तय फैसलों पर समयबद्ध कार्रवाई होती है तो वे सरकार के साथ सकारात्मक सहयोग बनाए रखेंगे। वहीं यदि वादों को पूरा नहीं किया गया तो आगे की रणनीति पर फिर विचार किया जा सकता है। दूसरी ओर, 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों और उनसे जुड़े मामलों पर भी चर्चा जारी है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और छात्रों का भरोसा वापस जीतने की चुनौती अब सरकार के सामने है। आने वाले दिनों में सरकार के फैसले और नई नीतियां तय करेंगी कि यह आंदोलन केवल एक विरोध तक सीमित रहता है या शिक्षा सुधार की दिशा में बड़े बदलाव का कारण बनता है।
