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संसद मार्च के पीछे क्या थी बड़ी साजिश? पहली FIR में हुए ऐसे खुलासे, जिसने बढ़ा दी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

दिल्ली में CJP प्रदर्शन के बाद कर्तव्य पथ थाने में पहली FIR दर्ज। हत्या के प्रयास समेत BNS की 13 गंभीर धाराएं लगाई गईं। जानिए पुलिस की एफआईआर में क्या-क्या आरोप हैं, कितने लोग घायल हुए और जांच कहां तक पहुंची।

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दिल्ली में संसद मार्ग और जंतर-मंतर के आसपास हुए CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने पहली एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच तेज कर दी है। कर्तव्य पथ थाना में दर्ज इस एफआईआर में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने हालात को हिंसक बनाने की कोशिश की और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी। शिकायत एक पुलिस इंस्पेक्टर की ओर से दर्ज कराई गई है, जिसमें 20 जुलाई को रेल भवन और रफी मार्ग के आसपास हुई घटनाओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग बैरिकेड्स के पास पहुंच गए थे और हालात तेजी से तनावपूर्ण हो गए। इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और अब पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच की जा रही है।

 FIR में लगाए गए गंभीर आरोप

एफआईआर के अनुसार, पुलिस बल सुबह से ही संवेदनशील इलाकों में तैनात था। अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को बताया कि क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू है और बिना अनुमति प्रदर्शन की इजाजत नहीं है। इसके बावजूद भीड़ पीछे हटने के बजाय आगे बढ़ती रही। पुलिस का आरोप है कि कुछ लोगों ने भीड़ को संसद की ओर बढ़ने के लिए उकसाया और सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पुलिसकर्मियों पर पत्थर, जूते-चप्पल और अन्य वस्तुएं फेंकी गईं, जिससे कई जवान घायल हुए। पुलिस ने इस आधार पर हत्या के प्रयास सहित सरकारी काम में बाधा डालने, दंगा करने, गैरकानूनी जमावड़ा लगाने और सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

129 पुलिसकर्मी और 60 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल

दिल्ली पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई को हुई झड़प में 129 पुलिसकर्मी और 60 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पहले लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब हालात बिगड़ते गए तो सीमित बल प्रयोग किया गया। पुलिस का कहना है कि संवेदनशील सरकारी इमारतों की सुरक्षा को देखते हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। अब जांच एजेंसियां घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) की मदद से उन लोगों की पहचान कर रही हैं, जो कथित रूप से हिंसा में शामिल थे। पुलिस का कहना है कि पहचान पूरी होने के बाद कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जांच पर टिकी नजर, अदालत में होंगे आरोपों की परीक्षा

इस मामले में दर्ज एफआईआर के बाद जांच कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। पुलिस घटनास्थल से मिले सबूत, वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। दूसरी ओर, प्रदर्शन से जुड़े पक्षों की ओर से भी पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था भंग करने और हिंसा फैलाने के आरोपों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच जारी रहेगी।

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