लद्दाख और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर पिछले 26 दिनों से अनशन पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना उपवास समाप्त कर दिया है। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती वांगचुक को केंद्र सरकार की ओर से एक आधिकारिक लिखित आश्वासन पत्र दिया गया, जिसके बाद उन्होंने अनशन तोड़ने का फैसला किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह खुद अस्पताल पहुंचे थे। 20 जुलाई को संसद चलो अभियान के दौरान हुए प्रदर्शन और बिगड़ते हालात के बाद सरकार की तरफ से गतिरोध सुलझाने की पहल तेज की गई थी। हालांकि, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसी मांग इस समझौते में शामिल नहीं रही, लेकिन सरकार के इस कदम से तनावपूर्ण माहौल में बड़ी राहत देखी जा रही है।
पत्नी गीतांजलि की अहम भूमिका और सरकार का संवाद
इस पूरे घटनाक्रम में सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की भूमिका बेहद निर्णायक साबित हुई। गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीधे गीतांजलि से फोन पर संपर्क किया था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार वांगचुक द्वारा उठाए गए सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने के लिए पूरी तरह तैयार है। डॉ. सिंह के अनुरोध पर गीतांजलि ने सोनम वांगचुक को अपने स्वास्थ्य और आंदोलन के भविष्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने के लिए समझाया। पत्नी की समझाइश और सरकार की ओर से मिले प्रत्यक्ष आश्वासन के बाद वांगचुक ने अनशन खत्म करने पर अपनी सहमति दी, जिससे पिछले कई दिनों से बना राजनीतिक और सामाजिक सस्पेंस खत्म हुआ।
आंदोलनकारियों से बातचीत और लद्दाख वापसी का प्लान
अनशन खत्म करने के बाद सोनम वांगचुक ने जल्द ही लद्दाख लौटने की इच्छा जाहिर की है। हालांकि, वहां जाने से पहले वे दिल्ली और आसपास आंदोलन कर रहे छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों से मुलाकात करेंगे। वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि वे युवाओं और छात्रों से सरकार के वादों पर भरोसा रखने की अपील करेंगे। उनका मानना है कि आंदोलन को हमेशा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक दायरे में ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को सचेत करते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में असामाजिक तत्वों के बहकावे में न आएं, क्योंकि हिंसा या असंतोष से आंदोलन का मूल उद्देश्य भटक सकता है और युवाओं की वास्तविक मांगों को नुकसान पहुंच सकता है।
विधेयक की तैयारी और गतिरोध खत्म करने की नई पहल
सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच जारी तनातनी को दूर करने के लिए अब दोनों पक्षों को एक निष्पक्ष स्थान पर सीधी बातचीत के लिए आमंत्रित किया जाएगा। संवादहीनता को तोड़ना भी वांगचुक की प्रमुख शर्तों में से एक था। इसके अलावा, सूत्रों के अनुसार सरकार अगले सप्ताह संसद में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के तहत एक विशेष विधेयक पेश करने की योजना बना रही है। यह विभाग सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय के नियंत्रण में आता है। उम्मीद जताई जा रही है कि शुक्रवार को होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्तावित विधेयक को हरी झंडी मिल सकती है, जिससे इस पूरे विवाद के स्थाई समाधान का रास्ता साफ हो सकता है।
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