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बीजेपी की महिला नेता को मिली संत परंपरा की बड़ी जिम्मेदारी! अब कहलाएंगी यति मां प्रत्यंगिरा गिरी, जानें क्यो?

भाजपा की महिला नेता डॉ. उदिता त्यागी को जूना अखाड़े ने महामंडलेश्वर घोषित किया। अब उन्हें ‘यति मां प्रत्यंगिरा गिरी’ के नाम से जाना जाएगा। जानिए उनका राजनीतिक, शैक्षणिक और धार्मिक सफर।

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हरिद्वार के कनखल स्थित हरिहर आश्रम में आयोजित एक धार्मिक समारोह में जूना अखाड़े ने भाजपा की सक्रिय महिला नेता डॉ. उदिता त्यागी को महामंडलेश्वर घोषित किया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार उनका विधिवत अभिषेक किया गया और उन्हें नया आध्यात्मिक नाम ‘यति मां प्रत्यंगिरा गिरी’ दिया गया। इस अवसर पर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने सभी वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराए। इसके बाद महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने घोषणा की कि अब डॉ. उदिता त्यागी को संत समाज में महामंडलेश्वर यति मां प्रत्यंगिरा गिरी के नाम से जाना जाएगा। इस घोषणा के बाद धार्मिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में उनकी चर्चा तेज हो गई है।

सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षणिक क्षेत्र में भी रही हैं सक्रिय

डॉ. उदिता त्यागी लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी रही हैं। वह भाजपा महिला मोर्चा में क्षेत्रीय मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुकी हैं और महाकाली वाहिनी की राष्ट्रीय समन्वयक के रूप में भी कार्य कर रही हैं। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न सामाजिक अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका नाम काफी चर्चित रहा है। उन्होंने दो अलग-अलग विषयों में पीएचडी की है और छात्र जीवन में रुहेलखंड विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था। इसके अलावा वे एक ब्यूटी कॉन्टेस्ट की विजेता भी रह चुकी हैं। राजनीति, शिक्षा और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहने के बाद अब उन्हें संत परंपरा में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है, जिसे उनके जीवन का नया अध्याय माना जा रहा है।

 सोशल मीडिया पर दी जानकारी, धर्म सेवा का लिया संकल्प

महामंडलेश्वर बनाए जाने के बाद डॉ. उदिता त्यागी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर इस सम्मान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह दायित्व उन्हें पूज्य दादा गुरु हरिगिरी महाराज, यति नरसिंहानंद गिरी महाराज और आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज के आशीर्वाद से प्राप्त हुआ है। उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताते हुए कहा कि यह केवल सम्मान नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि वह सनातन धर्म, संस्कृति और समाज की सेवा के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य करेंगी। समारोह के दौरान उन्हें श्री महाकाली पीठ हनुमत धाम, मुरादनगर का पीठाधीश्वर भी घोषित किया गया, जिससे उनकी धार्मिक जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं।

 गुरु परंपरा से जुड़ाव और आगे की भूमिका पर सबकी नजर

डॉ. उदिता त्यागी को यति नरसिंहानंद गिरी महाराज की प्रमुख शिष्या माना जाता है। धार्मिक आयोजनों और सनातन धर्म से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी पहले भी देखने को मिलती रही है। जूना अखाड़े द्वारा उन्हें महामंडलेश्वर बनाए जाने को उनके लंबे समय से चले आ रहे धार्मिक योगदान और संगठनात्मक कार्यों से जोड़कर देखा जा रहा है। अभिषेक समारोह के बाद उन्होंने अन्य संतों के साथ हरिद्वार के प्रसिद्ध माया देवी मंदिर और आनंद भैरव मंदिर में दर्शन किए तथा धर्म सेवा का संकल्प दोहराया। संत समाज में मिली इस नई जिम्मेदारी के बाद अब उनकी भूमिका केवल सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि धार्मिक गतिविधियों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी देखने को मिलेगी। यही कारण है कि उनकी नियुक्ति देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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