मेरठ के चर्चित ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। इसी क्रम में पीड़ित परिवार से मुलाकात करने जा रहे कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया। यह घटनाक्रम काशी टोल प्लाजा पर देखने को मिला, जहां कांग्रेस नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच काफी देर तक बातचीत चली। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि वे केवल पीड़ित परिवार का हाल जानने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए समर्थन देने जा रहे थे। हालांकि पुलिस ने उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी। इस घटना के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है और विभिन्न दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
टोल प्लाजा पर पुलिस और नेताओं के बीच हुई लंबी बातचीत
जानकारी के अनुसार, कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड से जुड़े परिवार से मिलने के लिए पहुंच रहा था। जैसे ही नेताओं का काफिला काशी टोल प्लाजा के पास पहुंचा, पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत का दौर शुरू हुआ। कांग्रेस नेताओं ने आगे जाने की अनुमति मांगी, लेकिन पुलिस अपने फैसले पर कायम रही। मौके पर मौजूद नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी पीड़ित परिवार से मिलने से रोकना उचित नहीं है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना था कि वे वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। काफी देर तक चली चर्चा के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल सका और प्रतिनिधिमंडल को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिली।
कांग्रेस ने सरकार और पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए। यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि प्रशासन निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है और राजनीतिक दबाव में फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्षी दलों को पीड़ित परिवारों से मिलने और उनकी बात सुनने का अधिकार है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि समाज के कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता दिखाई जानी चाहिए। वहीं अन्य नेताओं ने भी सवाल उठाया कि यदि सीमित संख्या में प्रतिनिधि परिवार से मिलने जा रहे थे, तो उन्हें रोकने की आवश्यकता क्यों पड़ी। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर आगे भी आवाज उठाने की बात कही है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने आने वाले दिनों में आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं। पार्टी नेताओं ने घोषणा की है कि 27 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें न्याय और जवाबदेही की मांग उठाई जाएगी। दूसरी ओर पुलिस प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले में कानून और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की मांग और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों की जानकारी वरिष्ठ स्तर तक पहुंचा दी गई है। प्रशासन ने कहा है कि जो भी निर्णय होगा, वह नियमों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लिया जाएगा। फिलहाल ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
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