अमेरिकी राजनीति और वैश्विक कूटनीति में अपनी बेबाकी के लिए मशहूर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। हाल ही में अमेरिकी-इजरायली हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान कुछ ऐसा हुआ, जिसने ट्रंप के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। दरअसल, खामेनेई की मौत के बाद ईरान की सड़कों पर लाखों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा, जो अपने नेता की विदाई पर फूट-फूटकर रो रहे थे। इस नजारे ने अमेरिकी राष्ट्रपति को हैरत में डाल दिया। ट्रंप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें हमेशा से लगता था कि ईरान की जनता खामेनेई से नफरत करती है, लेकिन सड़कों पर दिख रहा यह मंजर कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। हालांकि, ट्रंप ने तंज कसते हुए यह भी कह दिया कि “हो सकता है ये आंसू नकली हों।”
‘एक शॉट में खत्म कर देंगे’– ट्रंप की नई धमकी और बातचीत का ‘ब्रेक’
खामेनेई की विदाई के इस भावुक माहौल के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी और सीधी सैन्य धमकी दे डाली है। अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘Axios’ से विशेष बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि इस वक्त ईरान का पूरा शीर्ष नेतृत्व एक ही जगह पर मौजूद है और अमेरिका चाहे तो सिर्फ एक शॉट में उन सभी का नामोनिशान मिटा सकता है। हालांकि, उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ा कि वे ऐसा कदम नहीं उठाएंगे, क्योंकि अगर सारा नेतृत्व खत्म हो गया तो अमेरिका के पास बातचीत करने के लिए कोई बचेगा ही नहीं। ट्रंप के मुताबिक, ईरान इस समय बेहद कमजोर स्थिति में है और वह अमेरिका के साथ डील करने के लिए गिड़गिड़ा रहा है। दोनों देशों के बीच फिलहाल एक हफ्ते का युद्धविराम या ‘ब्रेक’ तय हुआ है, ताकि खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शांतिपूर्वक पूरी हो सके और इस दौरान कोई भी पक्ष एक-दूसरे पर हमला नहीं करेगा।
4 जुलाई का संयोग: अंतिम संस्कार की तारीख के पीछे की बड़ी इनसाइड स्टोरी
अली खामेनेई की मौत बीते 28 फरवरी को हुई था, लेकिन उनके अंतिम संस्कार की तारीख को लेकर महीनों तक सस्पेंस बना रहा। इस्लामिक परंपराओं के अनुसार किसी भी मृतक को 24 घंटे के भीतर दफनाया जाना अनिवार्य होता है, लेकिन युद्ध के मौजूदा हालातों और सुरक्षा कारणों से ऐसा मुमकिन नहीं हो सका। दिलचस्प बात यह है कि ईरान ने इस अंतिम संस्कार की शुरुआत के लिए 4 जुलाई का दिन चुना, जो कि अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस है और इस बार अमेरिका अपनी 250वीं वर्षगांठ मना रहा था। कूटनीतिक जानकार इसे ईरान की तरफ से एक प्रतीकात्मक संदेश मान रहे हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, 7 जुलाई को ईरान के पवित्र शहर कोम में धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे और आगामी 9 जुलाई को खामेनेई के गृह नगर मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। ट्रंप ने इस पर कहा कि अमेरिका ने एक “अच्छे पड़ोसी” और मानवीय दृष्टिकोण के नाते ईरान को एक हफ्ते की यह मोहलत दी है।
सुरक्षा का चक्रव्यूह: पिता के जनाजे में क्यों शामिल नहीं होंगे बेटे मुज्तबा?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर भारत से भी सामने आई है। भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के आधिकारिक प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही ने एएनआई (ANI) को दिए एक बयान में साफ किया है कि अली खामेनेई के बेटे और उनके संभावित उत्तराधिकारी मुज्तबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार की रस्मों में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होंगे। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह उनकी सुरक्षा को बताया गया है। इजरायल की लगातार मिल रही धमकियों और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की कड़ी निगरानी के कारण मुज्तबा का इस समय सार्वजनिक रूप से सामने आना उनके जीवन के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ईरान इस समय अपने बचे हुए शीर्ष नेतृत्व को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता, यही वजह है कि मुज्तबा को इस ऐतिहासिक और भावुक क्षण से पूरी तरह दूर रखने का एक कड़ा और रणनीतिक फैसला लिया गया है।
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