चर्चित केतन हत्याकांड में अब एक नया विवाद सामने आया है। इस बार मामला हत्या की जांच से नहीं, बल्कि मुख्य आरोपी सिया गोयल की ओर से अदालत में पैरवी करने वाले वकील को लेकर चर्चा में है। सुनवाई के दौरान दो अलग-अलग वकीलों ने दावा किया कि वे सिया का पक्ष रख रहे हैं। इसी बात को लेकर कोर्ट परिसर में काफी हलचल मच गई। इस पूरे घटनाक्रम ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। अदालत में मौजूद लोगों के बीच भी यह सवाल उठने लगा कि आखिर सिया की ओर से अधिकृत वकील कौन है। इस विवाद के कारण कुछ समय तक अदालत का माहौल भी तनावपूर्ण बना रहा।
सिया के बयान के बाद बदल गया पूरा घटनाक्रम
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि उनके पास सिया गोयल का हस्ताक्षरित वकालतनामा है और वही उसका पक्ष रख रहे हैं। लेकिन कुछ ही देर बाद सिया ने अदालत में स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल अधिवक्ता विपुल दुशिंग को ही अपना वकील नियुक्त किया है। सिया के इस बयान के बाद मामला पूरी तरह बदल गया। इसके बाद आशुतोष श्रीवास्तव ने अदालत में आगे कोई बहस नहीं की और वहां से चले गए। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया। अदालत में मौजूद लोगों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर काफी बातचीत होती रही।
परिवार और पुलिस ने भी रखा अपना पक्ष
सिया गोयल के परिवार ने भी साफ किया कि उनकी ओर से केवल विपुल दुशिंग को ही कानूनी जिम्मेदारी दी गई है। परिवार के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने किसी अन्य वकील को नियुक्त नहीं किया है। वहीं पुलिस की ओर से भी बताया गया कि जांच के दौरान उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है कि आशुतोष श्रीवास्तव या उनकी टीम को आधिकारिक रूप से इस मामले के लिए नियुक्त किया गया हो। हालांकि, अदालत में वकीलों के अलग-अलग दावों के बाद यह मामला कानूनी बहस का विषय बन गया है। अब आगे की सुनवाई में इस मुद्दे पर स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।
सिया के भाई को 10 करोड़ का मानहानि नोटिस
कोर्ट में हुए इस विवाद के बाद अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया गोयल के भाई साहिल गोयल को 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है। उनका आरोप है कि साहिल ने मीडिया के सामने यह बयान दिया कि उन्होंने कभी आशुतोष श्रीवास्तव को नियुक्त नहीं किया था। वकील का कहना है कि इस तरह के सार्वजनिक बयान से उनकी पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचा है। नोटिस में मांग की गई है कि साहिल गोयल अपने बयान वापस लें, सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और 10 करोड़ रुपये का हर्जाना दें। फिलहाल इस पूरे विवाद ने पहले से चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड को एक नया कानूनी मोड़ दे दिया है और अब सभी की नजर अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है।
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