गुरुवार की रात करीब 11 बजे जब लोग सोने की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक गाजियाबाद में एक अजीब सी घटना हुई। सैकड़ों लोगों के मोबाइल फोन एक बहुत ही तेज और डरावनी आवाज के साथ बजने लगे। फोन इतनी जोर से थरथराने (वाइब्रेट होने) लगे कि लोग डर गए। इतना ही नहीं, उस समय फोन की स्क्रीन पूरी तरह लॉक हो गई और कोई काम नहीं कर रही थी। स्क्रीन पर एक मैसेज लिखा था—”Extremely Severe Alert” (यानी बहुत गंभीर खतरा)। इसमें चेतावनी दी गई थी कि अगले 3 घंटे में भारी आंधी-तूफान, ओले और बारिश आने वाली है। इस अचानक आए अलार्म से पूरे इलाके में खौफ का माहौल बन गया, लोग समझ ही नहीं पाए कि आखिर माजरा क्या है।
मौसम सामान्य था, फिर इतना बड़ा अलर्ट क्यों?
इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात तब सामने आई, जब मौसम विभाग की असली रिपोर्ट देखी गई। मौसम विभाग ने गाजियाबाद से दूर मोदीनगर के इलाके के लिए केवल हल्की से मध्यम बारिश और सामान्य आंधी का अनुमान जताया था। अब जनता और जानकार लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब मौसम सामान्य था, तो इतना डरावना और गंभीर अलर्ट भेजने की क्या जरूरत थी? लोगों का कहना है कि अगर सरकार हर छोटी-मोटी आंधी-बारिश पर इस तरह का खतरनाक सायरन बजाएगी, तो कल को जब सच में कोई बड़ी आफत आएगी, तब लोग इसे मजाक समझकर नजरअंदाज कर देंगे।
क्या है यह नया सिस्टम जिसने सबको चौंकाया?
दरअसल, यह मैसेज भारत सरकार के एक नए सिस्टम ‘सेल ब्रॉडकास्ट’ के जरिए भेजा गया था। इस नई तकनीक को अभी हाल ही में मई 2026 में लॉन्च किया गया है, ताकि किसी भी बड़ी आपदा (जैसे भूकंप या बाढ़) के समय एक साथ लाखों लोगों को सावधान किया जा सके। इस सिस्टम की खास बात यह है कि नेटवर्क न होने पर भी यह सीधे आपके फोन पर पहुंच जाता है और आप इस अलर्ट को बंद भी नहीं कर सकते। लेकिन आपदा प्रबंधन के एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस नए सिस्टम में अभी कुछ कमियां हैं, जिन्हें सुधारना बहुत जरूरी है। इस अलर्ट में यह साफ-साफ नहीं बताया गया था कि जिले के किस हिस्से में खतरा है, जिससे पूरे शहर में बेवजह डर फैल गया।
सुधार की जरूरत, वरना लोग मान लेंगे इसे सिरदर्द
दुनिया के बाकी देशों, जैसे अमेरिका में इस तरह के सरकारी अलर्ट भेजने के बहुत कड़े नियम हैं। वहां पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही ऐसा अलार्म बजाया जाता है। भारत में भी इस सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय नियमों के हिसाब से ही बनाया गया है, लेकिन इसके इस्तेमाल को लेकर अभी कोई पक्का नियम (SOP) तय नहीं है। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस बात को लेकर काफी नाराजगी जताई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को जल्द ही इसके लिए नए नियम बनाने चाहिए। अगर आधी रात को सामान्य आंधी-पानी के लिए भी ऐसे कान फाड़ने वाले सायरन बजते रहे, तो यह सुविधा लोगों की सुरक्षा करने के बजाय उनकी दिमागी शांति को बिगाड़ने का काम करेगी।
