ओडिशा सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की है कि अब राज्य में बच्चों की पढ़ाई KG (किंडरगार्टन) से लेकर PG (पोस्ट ग्रेजुएशन) तक पूरी तरह मुफ्त होगी। इस घोषणा के बाद राज्य के छात्रों और अभिभावकों में राहत की भावना देखी जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बताया कि इस योजना का मकसद शिक्षा को हर वर्ग के लिए आसान और सुलभ बनाना है। खासकर उन परिवारों के लिए यह फैसला अहम माना जा रहा है, जो आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी नहीं करा पाते थे।
गरीब और लड़कियों की शिक्षा पर होगा सबसे ज्यादा असर
सरकार का कहना है कि इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और लड़कियों को मिलेगा। कई बार पैसे की कमी के कारण बच्चे स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। इस फैसले के बाद ऐसे मामलों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का दावा है कि जब शिक्षा का बोझ कम होगा, तो ज्यादा से ज्यादा बच्चे स्कूल और कॉलेज तक पहुंच पाएंगे। इससे राज्य में शिक्षा का स्तर सुधारने और ड्रॉपआउट रेट कम करने में मदद मिलेगी।
शिक्षा को लेकर सरकार का बड़ा विजन
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा को पूरी तरह से सरल और सभी के लिए समान अवसर वाला बनाना है। यह ऐलान राज्य सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर किया गया। सरकार का मानना है कि मुफ्त शिक्षा से न सिर्फ छात्रों का भविष्य बेहतर होगा, बल्कि राज्य के विकास में भी तेजी आएगी। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह योजना पूरी तरह लागू होती है तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।
अन्य राज्यों में भी शुरू हो सकती है ऐसी योजनाएं
इस फैसले के बीच देश के अन्य राज्यों में भी इस तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारी के अनुसार केरल में भी स्कूली शिक्षा और कॉलेज स्तर की पढ़ाई को मुफ्त करने पर विचार किया जा रहा है। वहां शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव भी रखा गया है। अगर यह लागू होता है, तो देश में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल ओडिशा के इस फैसले ने शिक्षा नीति पर नई बहस जरूर छेड़ दी है और अब सभी की नजर इसके लागू होने की प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
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