पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल देखने को मिला है। चुनावी हार के बाद पहले से ही दबाव में चल रही ममता बनर्जी को अब पार्टी के अंदर से ही बड़ा झटका लगा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर गंभीर असंतोष की खबरें सामने आई हैं, जहां कथित तौर पर 20 सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नया गुट बनाने का दावा किया है। यह घटनाक्रम सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिल्ली की राजनीति में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है। बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने न केवल खुद को अलग गुट के रूप में पेश किया है, बल्कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का भी ऐलान कर दिया है। इस खबर ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है और टीएमसी के भीतर नेतृत्व और एकजुटता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
बागी सांसदों का दावा
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बागी सांसदों ने खुद को “असली TMC” बताना शुरू कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सांसद डॉ. शर्मिला सरकार ने दावा किया है कि लगभग 20 से 21 सांसद एक अलग गुट बना रहे हैं और यह गुट संसद में स्वतंत्र रूप से काम करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि नए गुट की चीफ व्हिप काकोली घोष को बनाया गया है, जबकि शताब्दी घोष को डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं संसद में इस गुट का नेतृत्व भी काकोली घोष दस्तीदार करेंगी। इन दावों ने राजनीतिक माहौल को और ज्यादा उलझा दिया है क्योंकि अब यह सिर्फ असंतोष नहीं बल्कि औपचारिक विभाजन की ओर इशारा करता दिखाई दे रहा है। हालांकि टीएमसी की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक और स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
NDA को समर्थन का ऐलान और स्पीकर से मुलाकात की तैयारी
सूत्रों और बागी सांसदों के बयान के मुताबिक, यह नया गुट जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकता है। सांसदों का कहना है कि वे औपचारिक रूप से अपने नए राजनीतिक रुख को संसद में दर्ज कराना चाहते हैं। काकोली घोष ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि 20 सांसदों ने NDA को समर्थन देने का निर्णय लिया है और इस संबंध में एक पत्र भी लोकसभा स्पीकर को भेजा गया है। इस पत्र में कथित रूप से एनडीए के साथ सहयोग की इच्छा जताई गई है। सांसदों का कहना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों को वे स्वीकार कर चुके हैं और अब उनकी राजनीतिक दिशा राष्ट्रीय राजनीति में नए गठबंधन के साथ आगे बढ़ने की है। इस फैसले ने संसद के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
क्या सच में टूट गई है टीएमसी या यह सिर्फ राजनीतिक दबाव?
इस पूरे विवाद की जड़ में वह बैठक भी बताई जा रही है, जो कथित तौर पर बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई थी, जहां कुछ TMC सांसदों की मौजूदगी का दावा किया गया। इसी मुलाकात के बाद बगावत की चर्चाएं और तेज हो गईं। हालांकि अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष और नेतृत्व को लेकर सवालों का संकेत हो सकता है, लेकिन बिना औपचारिक घोषणा के इसे पूर्ण टूट नहीं माना जा सकता। वहीं दूसरी ओर, टीएमसी खेमे से इस पर चुप्पी बनी हुई है, जिससे सस्पेंस और बढ़ गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि लोकसभा स्पीकर के सामने क्या स्थिति स्पष्ट होती है और क्या यह वाकई किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत है।
