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22 साल में लिया संन्यास, 26 साल में बने सांसद, फिर पहुंचे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक: जानिए योगी आदित्यनाथ की कहानी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 54वें जन्मदिन पर जानिए उनका पूरा सफर। अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बनने, सांसद और फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने तक की आसान भाषा में पूरी कहानी।

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योगी आदित्यनाथ आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन उनका जीवन हमेशा से ऐसा नहीं था। उनका जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनका असली नाम अजय सिंह बिष्ट था। पढ़ाई के दौरान उनका झुकाव धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ने लगा। उन्होंने गणित विषय से स्नातक की पढ़ाई की, लेकिन 22 साल की उम्र में घर-परिवार छोड़कर संन्यास का रास्ता चुन लिया। इसके बाद वे गोरखपुर पहुंचे और गोरखनाथ मंदिर से जुड़ गए। यहीं उन्हें नया नाम योगी आदित्यनाथ मिला और उनके जीवन की नई शुरुआत हुई।

कम उम्र में बने सांसद, राजनीति में बनाई पहचान

योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक जीवन के साथ-साथ लोगों की समस्याओं को भी करीब से समझा। इसी वजह से उन्होंने राजनीति में कदम रखा। वर्ष 1998 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 26 साल थी। इसके बाद वे लगातार कई बार सांसद चुने गए। पूर्वांचल में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। लोगों के बीच उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी जो क्षेत्र की समस्याओं को खुलकर उठाते थे। धीरे-धीरे उनका नाम प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बनने लगा।

मुख्यमंत्री बनने के बाद बढ़ी जिम्मेदारी

साल 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली और योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कानून-व्यवस्था, सड़क, बिजली, निवेश और विकास से जुड़े कई बड़े फैसले लिए। उनके कार्यकाल में कई एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेज और विकास परियोजनाएं शुरू हुईं। साल 2022 में भाजपा ने फिर से बहुमत हासिल किया और योगी दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। लगातार दूसरा कार्यकाल मिलने के बाद उनकी राजनीतिक ताकत और बढ़ी। आज वे भाजपा के सबसे बड़े नेताओं में गिने जाते हैं।

अनुशासित जीवन और मजबूत राजनीतिक पहचान

योगी आदित्यनाथ अपनी सादगी और अनुशासित दिनचर्या के लिए भी जाने जाते हैं। उनकी सुबह योग और पूजा-पाठ से शुरू होती है। मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ वे गोरक्षपीठ की जिम्मेदारियां भी निभाते हैं। देश के कई राज्यों में चुनाव प्रचार के दौरान भी उनकी बड़ी भूमिका रहती है। समर्थक उन्हें एक मजबूत और फैसले लेने वाला नेता मानते हैं। 54वें जन्मदिन के मौके पर उनके समर्थक विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर प्रदेश के सबसे बड़े पद तक पहुंचने का उनका सफर आज कई लोगों के लिए प्रेरणा का विषय माना जाता है।

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