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2029 से पहले बड़ा चुनावी बदलाव? परिसीमन पर मोदी सरकार का मास्टर प्लान तैयार

मोदी सरकार परिसीमन को लेकर राजनीतिक सहमति बनाने में जुटी। 2029 लोकसभा चुनाव से पहले नया विधेयक लाने की तैयारी, राज्यों की सीटों पर बड़ा असर संभव।

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देश में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन को लेकर बड़ी राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। मोदी सरकार इस महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया पर राजनीतिक सहमति बनाने में जुट गई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार का लक्ष्य है कि परिसीमन से जुड़ा एक नया विधेयक लाकर इसे चुनाव से पहले लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाए। माना जा रहा है कि अगर यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो देश के संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का बड़े स्तर पर पुनर्गठन हो सकता है, जिसका सीधा असर राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा।

क्षेत्रीय दलों से चल रहा परामर्श

सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर कई क्षेत्रीय दलों से बातचीत शुरू कर दी है। इनमें DMK और Trinamool Congress जैसे प्रमुख दल शामिल हैं। सरकार का कहना है कि किसी भी विधेयक को आगे बढ़ाने से पहले सभी हितधारकों से चर्चा जरूरी है ताकि राजनीतिक विवाद से बचा जा सके। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब परिसीमन का मुद्दा कई राज्यों के लिए संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि इससे लोकसभा सीटों का संतुलन बदल सकता है।

1971 के आंकड़ों से जुड़ा पुराना सिस्टम

वर्तमान में लोकसभा सीटों का वितरण 1971 की जनगणना के आधार पर तय व्यवस्था पर टिका हुआ है। उस समय जनसंख्या के अनुसार राज्यों को सीटें दी गई थीं, और उसके बाद लंबे समय तक इसमें बड़ा बदलाव नहीं हुआ। फिलहाल लोकसभा में 543 निर्वाचित सदस्य हैं। सरकार का मानना है कि समय के साथ जनसंख्या में बड़े बदलाव हुए हैं, इसलिए परिसीमन जरूरी हो सकता है। लेकिन कई राज्यों की चिंता यह है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है, उन्हें सीटों के मामले में नुकसान हो सकता है। यही कारण है कि यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया है।

सहमति बनने के बाद ही आगे बढ़ेगा कदम

सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार एक ऐसा फॉर्मूला तैयार करने की कोशिश कर रही है जो सभी राज्यों के हितों को संतुलित कर सके। फिलहाल बातचीत का दौर जारी है और इसे सकारात्मक बताया जा रहा है। जब तक व्यापक राजनीतिक सहमति नहीं बनती, तब तक सरकार कोई अंतिम कदम नहीं उठाएगी। लेकिन माना जा रहा है कि सहमति बनने के बाद एक नया विधेयक लाया जा सकता है, जिससे देश के चुनावी नक्शे में बड़ा बदलाव संभव है। परिसीमन का यह प्रयास संघीय ढांचे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व दोनों पर गहरा असर डाल सकता है, इसलिए इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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