कानपुर में पुलिस विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला एक मामला सामने आया है, जहां ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी पर स्थानीय ठेला और रेहड़ी संचालकों से मुफ्त में खाने-पीने का सामान लेने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र के कई दुकानदार और फेरी लगाने वाले लंबे समय से इस व्यवहार से परेशान थे। उनका आरोप था कि पुलिस वाहन में तैनात कुछ कर्मी अक्सर उनसे बिना पैसे दिए आइसक्रीम, गोलगप्पे और अन्य खाद्य सामग्री ले जाते थे। शुरुआत में छोटे व्यापारियों ने इस मामले को नजरअंदाज किया, लेकिन जब यह सिलसिला लगातार जारी रहा तो उन्होंने इसकी शिकायत करने का फैसला लिया। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि गरीब और छोटे कारोबारियों पर इस तरह का दबाव डालना पूरी तरह गलत है, क्योंकि उनकी रोजी-रोटी पहले ही सीमित आमदनी पर निर्भर करती है। इसी शिकायत ने आगे चलकर एक बड़े विभागीय कार्रवाई का रूप ले लिया।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किलें
मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब कुछ व्यापारियों ने कथित रूप से पुलिसकर्मी की गतिविधियों का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में एक पुलिसकर्मी को ड्यूटी के दौरान खाने-पीने की सामग्री लेते हुए देखा गया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और देखते ही देखते लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। वीडियो सामने आने के बाद आम नागरिकों ने भी इस पर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जिन पुलिसकर्मियों पर कानून का पालन कराने की जिम्मेदारी है, यदि वही छोटे दुकानदारों पर दबाव बनाकर मुफ्त सामान लेते हैं तो इससे पुलिस की साख प्रभावित होती है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों तक भी मामला पहुंचा, जिसके बाद तत्काल संज्ञान लिया गया। पुलिस प्रशासन ने वीडियो की जांच शुरू कराई और संबंधित शिकायतों की सत्यता की पड़ताल की गई।
प्राथमिक जांच में सही पाए गए आरोप
शिकायत और वायरल वीडियो के आधार पर अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच कराई। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित पुलिसकर्मी पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस विभाग में अनुशासन और ईमानदारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी कर्मचारी को अपने पद का गलत इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई केवल वीडियो के आधार पर नहीं बल्कि शिकायतकर्ताओं के बयानों और अन्य उपलब्ध तथ्यों की जांच के बाद की गई है। विभाग का मानना है कि इस तरह की घटनाएं पुलिस और जनता के बीच विश्वास को कमजोर करती हैं, इसलिए ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जरूरी है। निलंबन के बाद यह मामला पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है।
अब होगी विस्तृत जांच, बढ़ सकती है कार्रवाई
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निलंबन केवल शुरुआती कदम है और मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। इस पूरे प्रकरण की जांच एक वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी गई है, जो सभी पक्षों से जानकारी जुटाकर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि क्या यह घटना एक बार की थी या फिर लंबे समय से इस तरह की गतिविधियां चल रही थीं। यदि विस्तृत जांच में आरोप पूरी तरह साबित होते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा है कि जनता की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और किसी भी स्तर पर भ्रष्ट या अनुचित आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं स्थानीय व्यापारियों ने कार्रवाई का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि भविष्य में छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। फिलहाल सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जो आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेगी।
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