भारत में बढ़ती गर्मी और हीटवेव अब सिर्फ असुविधा का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के रूप में सामने आ रही है। हालिया विश्लेषण और शोध रिपोर्टों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी के दौरान मृत्यु दर में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखी जा सकती है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर परिस्थितियां ऐसे ही बनी रहीं, तो एक ही दिन की भीषण गर्मी में हजारों अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में लगातार वृद्धि और हीटवेव की बढ़ती अवधि आने वाले वर्षों में स्थिति को और गंभीर बना सकती है। भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में इसका प्रभाव और भी व्यापक हो सकता है, जहां बड़ी संख्या में लोग खुले वातावरण में काम करते हैं और सीधे धूप के संपर्क में रहते हैं।
स्टडी में चौंकाने वाला अनुमान, यूपी समेत कई राज्य हाई रिस्क में
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी बर्कले के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किए गए विश्लेषण के अनुसार, अत्यधिक गर्मी के एक दिन में लगभग 3,400 अतिरिक्त मौतों की संभावना जताई गई है, जबकि लगातार पांच दिनों की हीटवेव में यह आंकड़ा 30,000 तक पहुंच सकता है। यह अनुमान विभिन्न शहरों और पुराने आंकड़ों के अध्ययन पर आधारित है। रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल किया गया है, जहां बड़ी आबादी और ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकता जोखिम को बढ़ाती है। अनुमान के अनुसार, केवल यूपी में पांच दिन की भीषण गर्मी के दौरान 8,000 से अधिक अतिरिक्त मौतों की आशंका जताई गई है। इसके अलावा अहमदाबाद, जयपुर और सूरत जैसे शहरों में भी गर्मी का प्रभाव गंभीर स्तर पर पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़े “न्यूनतम अनुमान” हैं, यानी वास्तविक स्थिति इससे भी ज्यादा गंभीर हो सकती है।
शहरी हीटवेव और ‘गर्म रातें’ बना रही हालात और खतरनाक
हाल के वर्षों में गर्मी का स्वरूप बदल गया है। अब समस्या केवल दिन के समय की नहीं रह गई है, बल्कि “गर्म रातें” भी एक नई चुनौती बनकर सामने आई हैं। शहरों में कंक्रीट, सड़कें और ऊंची इमारतें दिनभर की गर्मी को सोखकर रात में भी वातावरण को गर्म बनाए रखती हैं। कई क्षेत्रों में रात 10 बजे तक तापमान असामान्य रूप से ऊंचा रहता है, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल पाती। इसका सीधा असर बुजुर्गों, मजदूरों, ई-रिक्शा चालकों, निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों और किसानों पर पड़ रहा है। लगातार गर्मी के संपर्क में रहने से लू, डिहाइड्रेशन और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में हीटस्ट्रोक से हुई मौतें अलग श्रेणी में दर्ज ही नहीं हो पातीं, जिससे वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आते।
विशेषज्ञों की चेतावनी—अब कार्रवाई नहीं तो हालात होंगे और भयावह
जलवायु विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर वैश्विक तापमान वृद्धि पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले वर्षों में हीटवेव और अधिक खतरनाक रूप ले सकती है। उनका कहना है कि अब समय आ गया है जब सरकारों को मजबूत अलर्ट सिस्टम, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और गर्मी से बचाव के लिए विशेष योजनाएं लागू करनी होंगी। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी बताया गया है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि गर्मी अब केवल मौसमी समस्या नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा बन चुकी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो 2027 की गर्मियां और भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती हैं, जिससे लाखों लोगों की जिंदगी सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है।
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