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एशियन गेम्स का टिकट… और पीठ में 2 गोलियां! जिस साथी के साथ जीतना था गोल्ड, उसी ने खेल दिया मौत का ‘खूनी खेल’

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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसा खौफनाक मामला सामने आया है जिसने खेल जगत के साथ-साथ हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। कोतवाली थाना क्षेत्र के साईं उपवन में शनिवार को देश के उभरते हुए पैरा ओलंपिक धावक चिराग त्यागी का खून से लथपथ शव मिलने से हड़कंप मच गया। चिराग की पीठ और शरीर पर गोलियों के निशान थे, जो साफ गवाही दे रहे थे कि वारदात को बेहद नजदीक से अंजाम दिया गया था। पुलिस ने जब इस हाईप्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री की कड़ियां जोड़ना शुरू किया, तो सामने आया सच बेहद डरावना था। जिस खिलाड़ी पर देश को इंटरनेशनल लेवल पर मेडल दिलाने का नाज था, उसकी जान किसी और ने नहीं बल्कि उसके ही एक बेहद करीबी और साथी खिलाड़ी ने ली थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और कत्ल में इस्तेमाल हथियार भी जब्त कर लिया है।

एक शिकायत और बदले की आग: आखिर क्यों दोस्त बन गया जान का दुश्मन?

पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी की पहचान 17 वर्षीय यश के रूप में हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि यश खुद भी चिराग की तरह ब्लाइंड कैटेगरी का पैरा एथलीट है और चिराग के गांव बसंतपुर के पास रावली रोड का रहने वाला है। दोनों साथ में ही प्रैक्टिस करते थे, लेकिन इस दोस्ती के पीछे नफरत की एक गहरी कहानी पक रही थी। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि चिराग ने कुछ समय पहले यश के खेल से जुड़े दस्तावेजों (डॉक्यूमेंट्स) की गड़बड़ी को लेकर खेल अधिकारियों से शिकायत कर दी थी। इस शिकायत की वजह से यश का खेल करियर दांव पर लग गया था। इसी बात का बदला लेने के लिए यश के सिर पर खून सवार हो गया और उसने चिराग को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली।

इकलौते बेटे की मौत से टूटा परिवार, रोते हुए पिता बोले- ‘सब कुछ खत्म हो गया’

मूल रूप से मुरादनगर के रहने वाले चिराग अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। चिराग की मौत ने उनके हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। रोते-बिलखते पिता मनोज त्यागी ने बताया कि उनके बेटे की किसी से कोई निजी दुश्मनी नहीं थी। उन्होंने अपने बेटे को एक बड़ा एथलीट बनाने के लिए अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई और पूरी जमा-पूंजी दांव पर लगा दी थी। उन्हें उम्मीद थी कि चिराग एक दिन दुनिया में उनका और देश का नाम रोशन करेगा। लेकिन उन्हें क्या पता था कि आपसी जलन और ईर्ष्या के कारण उनके घर का इकलौता चिराग इस तरह बुझा दिया जाएगा। पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से हत्यारे को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।

जापान में तिरंगा लहराने का सपना रह गया अधूरा, सदमे में खेल जगत

यह पूरी घटना इसलिए भी ज्यादा दर्दनाक है क्योंकि चिराग इन दिनों अपने करियर के सबसे बेहतरीन फॉर्म में थे। हाल ही में बेंगलुरु में आयोजित नेशनल एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने 400 मीटर रेस में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता था। इतना ही नहीं, चिराग का चयन अक्टूबर में जापान में होने वाले एशियाई खेलों (Asian Games) के लिए भी हो चुका था। वह देश के लिए इंटरनेशनल मेडल जीतने का सपना लिए इन दिनों दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में दिन-रात पसीना बहा रहे थे। लेकिन एक सिरफिरे साथी की रंजिश ने जापान जाने से पहले ही चिराग की जीवनलीला समाप्त कर दी। फिलहाल पुलिस ने नाबालिग आरोपी को कोर्ट में पेश कर दिया है और मामले की आगे की जांच की जा रही है।

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