सांगली (महाराष्ट्र): देश भले ही तकनीकी रूप से चांद और तरक्की की नई ऊंचाइयों को छू रहा हो, लेकिन समाज में पैर पसारे अंधविश्वास के काले कारनामे आज भी मासूम जिंदगियों को बर्बाद कर रहे हैं। महाराष्ट्र के सांगली जिले से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने आस्था और अध्यात्म के नाम पर चल रहे ढोंग का पूरी तरह पर्दाफाश कर दिया है। विटा शहर में कुछ ढोंगी बाबाओं ने मिलकर एक नाबालिग लड़की को अपनी घिनौनी साज़िश का शिकार बनाया। इस खौफनाक खेल में लड़की को ‘देवी’ और ‘पिछले जन्म की नागिन’ बताकर न सिर्फ उसका शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया, बल्कि उसके परिवार को लाखों रुपये का चूना भी लगाया गया। आइए जानते हैं कि आस्था की आड़ में इस पूरी वारदात को अंजाम कैसे दिया गया।
बीमारी का फायदा और ‘कडेश्वर धाम’ का मायाजाल
यह पूरी सनसनीखेज घटना विटा के पाटिल बस्ती इलाके में स्थित ‘कडेश्वर धाम अध्यात्म संस्था’ नाम के एक तथाकथित आश्रम से जुड़ी है। इस आश्रम की कमान महेश मोहन बाबर, संकेत संदीप निकम और सूरज उपाध्ये नाम के तीन शातिर लोगों के हाथों में थी। पीड़ित नाबालिग लड़की पिछले कुछ समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं (बीमारी) से परेशान चल रही थी। जब डॉक्टरों के इलाज से कोई राहत नहीं मिली, तो अंधविश्वास के चक्कर में उसका परिवार चमत्कार की उम्मीद लिए इस आश्रम तक पहुंच गया। आरोपियों ने लड़की की लाचारी और परिवार की मजबूरी का फायदा उठाने की योजना बनाई। उन्होंने लड़की के माता-पिता को यह विश्वास दिलाना शुरू कर दिया कि उनकी बेटी की बीमारी कोई साधारण समस्या नहीं है, बल्कि उसके भीतर खुद साक्षात ‘देवी’ का वास है।
‘पिछले जन्म की नागिन’ और शादी का अजीब ढोंग
अंधविश्वास का यह खेल यहीं खत्म नहीं हुआ, बल्कि इसमें एक बेहद अजीब और घिनौना मोड़ तब आया जब मुख्य आरोपी संकेत निकम ने खुद को ‘महाकाल और बालूमामा का साक्षात अवतार’ घोषित कर दिया। इसके बाद इन पाखंडियों ने लड़की का ब्रेनवॉश करते हुए कहा कि वह अपने पिछले जन्म में एक ‘नागिन’ थी और संकेत इस जन्म में उसका ‘नाग’ है। उन्होंने लड़की के मन में यह बात पूरी तरह से बिठा दी कि उन दोनों का मिलन और शादी होना भगवान की मर्जी है और यह पहले से ही तय है। इसी अध्यात्म और अवतार के झूठे जाल में फंसाकर आरोपी संकेत ने नाबालिग लड़की को बहलाया-फुसलाकर उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए और काफी समय तक उसका यौन शोषण करता रहा।
वीडियो वायरल करने की धमकी और 5 लाख की बड़ी ठगी
जब मासूम पीड़िता को इन पाखंडियों की असलियत समझ आई और उसने इस घिनौने कृत्य का विरोध करना शुरू किया, तो आरोपियों ने अपना असली क्रूर रूप दिखाया। आरोपी सूरज उपाध्ये ने लड़की को डराया-धमकाया कि अगर उसने मुंह खोला या किसी को कुछ भी बताया, तो उसकी जिंदगी पूरी तरह तबाह कर दी जाएगी। आरोपियों ने लड़की के कुछ आपत्तिजनक वीडियो भी बना लिए थे, जिन्हें इंटरनेट पर वायरल करने की धमकी देकर उसे खामोश रहने पर मजबूर किया गया। इसी खौफ के बीच, आरोपियों ने लड़की के पिता को भारी मुसीबत और अनहोनी का डर दिखाकर पूजा-पाठ और विशेष हवन के नाम पर करीब 5 लाख रुपये ऐंठ लिए। इसमें से 4.5 लाख रुपये बैंक ट्रांसफर के जरिए और 50 हजार रुपये नकद लिए गए थे।
हिम्मत का कदम और पुलिस की बड़ी कार्रवाई
लगातार शारीरिक प्रताड़ना, मानसिक तनाव और आर्थिक रूप से कंगाल होने के बाद आखिरकार पीड़िता का सब्र का बांध टूट गया। उसने इस खौफ के साए से बाहर निकलने की हिम्मत जुटाई और पूरी आपबीती अपने परिवार को बताई। इसके बाद यह मामला पुलिस के पास पहुंचा। विटा पुलिस स्टेशन में पीड़िता की शिकायत पर तुरंत एक्शन लेते हुए मुख्य आरोपियों—महेश मोहन बाबर, संकेत संदीप निकम और सूरज उपाध्ये के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने इन तीनों पर पोक्सो एक्ट (POCSO Act), भारतीय न्याय संहिता (BNS) और महाराष्ट्र अंधश्रद्धा और जादू-टोना निवारण अधिनियम 2013 की धारा 3 के तहत केस दर्ज कर आगे की तफ्तीश शुरू कर दी है।
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