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दारुल उलूम के नीचे नहीं निकले शिव मंदिर तो दे देना फांसी… हिंदू रक्षा दल के दावे से सहारनपुर में बढ़ी हलचल

Hindu Raksha Dal ने सहारनपुर के Darul Uloom Deoband परिसर के नीचे शिव मंदिर होने का दावा किया है। संगठन ने वैज्ञानिक जांच और खुदाई की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित Darul Uloom Deoband को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। Hindu Raksha Dal के कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि दारुल उलूम परिसर की मस्जिद के नीचे एक प्राचीन शिव मंदिर मौजूद है। इस दावे के बाद इलाके में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। गुरुवार को संगठन के पदाधिकारियों और समर्थकों ने सहारनपुर में प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने मांग की कि पूरे परिसर की वैज्ञानिक जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर खुदाई भी की जाए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की और कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। फिलहाल प्रशासन और दारुल उलूम की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पूरे मामले ने नई बहस छेड़ दी है।

14 फीट नीचे शिव मंदिर होने का दावा

Hindu Raksha Dal के उत्तराखंड प्रदेशाध्यक्ष Lalit Sharma ने दावा किया कि दारुल उलूम परिसर में करीब 14 फीट नीचे प्राचीन शिव मंदिर और शिवलिंग मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें स्थानीय लोगों और कुछ अन्य स्रोतों से इस संबंध में जानकारी मिली है। संगठन का कहना है कि इस पूरे मामले की जांच आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सर्वे के जरिए कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। प्रदर्शन के दौरान ललित शर्मा ने यहां तक कहा कि अगर खुदाई में मंदिर नहीं मिलता है तो उन्हें फांसी दे दी जाए। उनके इस बयान के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया। संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था का विषय है और प्रशासन को इसमें देरी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि अगर जांच में किसी मंदिर या धार्मिक अवशेष के प्रमाण मिलते हैं, तो उन्हें संरक्षित किया जाए और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाए।

प्रशासन से सर्वे और खुदाई की मांग

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सहारनपुर डीएम कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए वैज्ञानिक सर्वे जरूरी है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में मंदिर के अवशेष मिलने की पुष्टि होती है तो अदालत में जनहित याचिका दायर की जाएगी। साथ ही सरकार से मंदिर को “मुक्त कराने” की मांग भी की जाएगी। बता दें कि Darul Uloom Deoband देश के सबसे प्रमुख इस्लामिक शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। इसकी स्थापना वर्ष 1866 में हुई थी और यह धार्मिक शिक्षा तथा फतवों के कारण अक्सर चर्चा में रहता है। अब परिसर के नीचे मंदिर होने के दावे ने इस संस्थान को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। प्रशासन की ओर से भी मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रखी जा रही है ताकि किसी तरह का तनाव पैदा न हो।

राजनीतिक बयानबाजी से और गरमाया मामला

इस पूरे विवाद के दौरान Lalit Sharma ने राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने Iqra Hasan और Samajwadi Party पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ नेता केवल राजनीति करने के उद्देश्य से ऐसे मामलों में सक्रिय होते हैं। ललित शर्मा ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी जातीय और सामाजिक विभाजन की राजनीति कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अलग-अलग समुदायों के बीच तनाव पैदा कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करती है। साथ ही उन्होंने कहा कि 2027 के चुनाव को ध्यान में रखकर ऐसी राजनीति की जा रही है। दूसरी तरफ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धार्मिक स्थलों को लेकर होने वाले दावे अक्सर बड़े राजनीतिक मुद्दों में बदल जाते हैं। फिलहाल प्रशासन इस मामले पर नजर बनाए हुए है और सभी पक्षों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक कार्रवाई और संभावित जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि दावों में कितनी सच्चाई है।

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